लगता है कि सेबी ने एफएंडओ के नए नियमों के प्रस्ताव पर ब्रोकरेज फर्मों की फीडबैक पर ध्यान नहीं दिया। सेबी के इस मसले पर कंसल्टेशन पेपर जारी करने के बाद ट्रेडर्स और ब्रोकरेज फर्मों ने खुलकर अपनी राय बताई थी। लेकिन, सेबी ने इनकी अनदेखी की। उसने पहले से तैयार फ्रेमवर्क के हिसाब से एफएंडओ के नियमों में बदलाव कर दिए। उसने एफएंडओ ट्रेडिंग के नियमों में छह बड़े बदलाव किए हैं। सेबी की दलील है कि इससे शेयरों के इंडेक्स डेरिवेटिव मार्केट को मजबूत मिलेगी। लेकिन, ऐसा लगता है कि इस बदलाव का मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा और सेबी, सरकार सहित सभी पक्षों को इससे नुकसान हो सकता है।
