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F&O में एक्सपायरी के दिन फटाफट कमाई पर SEBI की टेढ़ी नजर, जानिए क्या है पूरा मामला

कोविड की महामारी शुरू होने के बाद से इंडिया में शेयरों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग काफी ज्यादा बढ़ी है। SEBI इस पर कई बार चिंता जता चुका है। इस हफ्ते की शुरुआत में उसने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया। इसका मकसद मार्केट में स्टैबिलिटी लाना और रिटेल ट्रेडर्स के हितों की सुरक्षा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 02, 2024 पर 12:47 PM
F&O में एक्सपायरी के दिन फटाफट कमाई पर SEBI की टेढ़ी नजर, जानिए क्या है पूरा मामला
FY24 में एफएंडओ ट्रेडिंग करने वाले रिटेल ट्रेडर्स को 50,000 करोड़ से ज्यादा लॉस हुआ है।

कोविड की महामारी के बाद से इंडिया में डेरिवेटिव ट्रेडिंग काफी बढ़ी है। आज एक्टिव करीब 80 फीसदी डीमैट अकाउंट्स अप्रैल 2020 के बाद खुले हैं। इससे डेरिवेटिव ट्रेंडिंग के मामले में इंडियन मार्केट दुनिया में पहले पायदान पर आ गया है। दुनिया में एक्सचेंजों में होने वाली कुल डेरिवेटिव ट्रेडिंग में इंडिया की हिस्सेदारी 30-50 फीसदी तक पहुंच गई है। रेगुलेटर्स ने इससे जुड़े रिस्क पर कई बार चिंता जताई है। इस हफ्ते सेबी ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया। रिटेल इनवेस्टर्स को बड़े नुकसान से बचाने के लिए सेबी ने एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया है।

सेबी के पास स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग के ठोस सबूत

सेबी का मानना है कि पिछले कुछ सालों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivative Trading) के बढ़ते वॉल्यूम में इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट (Index Options Contracts) का बड़ा हाथ है। इसके अलावा नोशनल और प्रीमियम टर्नओवर और वोलैटिलिटी के डेटा के आधार पर सेबी ने यह साबित किया है कि इंडेक्स-ऑप्शंस में बढ़ती एक्टिविटी में एक्सपायरी डे ट्रेडिंग का बड़ा हाथ है। एक्सपायरी से कुछ मिनट पहले ओपन इंटरेस्ट (OI) का हाई वॉल्यूम इस बात का संकेत है कि पार्टिसिपेंट्स कुछ ही मिनट के अंदर पॉजिशन एनिशिएट और क्लोज करते हैं। यह स्पेकुलेटिव ट्रेड है।

'जीरो टू हीरो स्ट्रेटेजी' का इस्तेमाल करते हैं ट्रेडर्स

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