लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स शुरू हो सकते हैं, SEBI चेयरमैन ने दी जानकारी

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि कैपिटल मार्केट्स को और मजबूत बनाने के लिए इक्विटी सेगमेंट्स में लंबी अवधि के फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर रेगुलेटर विचार कर रहा है। लंबी अवधि के फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की शुरुआत से मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ेगा

अपडेटेड Jun 13, 2026 पर 10:21 AM
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सेबी बॉन्ड मार्केट से लिंक्ड डेरिवेटिव्स शुरू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से भी बात कर रहा है।

सेबी ने एक बार फिर कहा है कि डेरिवेटिव और कैश मार्केट का विस्तार उसकी प्राथमिकता है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि कैपिटल मार्केट्स को और मजबूत बनाने के लिए इक्विटी सेगमेंट्स में लंबी अवधि के फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स पर रेगुलेटर विचार कर रहा है।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स से मार्केट पार्टिसिपेशन बढ़ेगा

सेबी चीफ ने एक कार्यक्रम में बताया कि लंबी अवधि के फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स की शुरुआत से मार्केट में पार्टिसिपेशन बढ़ेगा। साथ ही इससे रिस्क मैनेजमेंट क्षमता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा, "सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग और शॉर्ट सेलिंग फ्रेमवर्क की भी व्यापक समीक्षा की जा रही है। इसका मकसद कैश और डेरिवेटिव माक्केट्स के बीच इंटरलिंकेज बढ़ाना है। इससे लिक्विडिटी भी बढ़ेगी।"


बॉन्ड मार्केट से लिंक्ड डेरिवेटिव्स शुरू करने की भी तैयारी

सेबी बॉन्ड मार्केट से लिंक्ड डेरिवेटिव्स शुरू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से भी बात कर रहा है। रेगुलेटर इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) फ्रेमवर्क की भी समीक्षा कर रहा है। पांडेय ने कहा, "हम इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म की समीक्षा कर रहे हैं ताकि एआई, सेमीकंडक्टर्स, क्लीन एनर्जी, बायोटेक जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर्स मार्केट से लंबी अवधि की पूंजी जुटा सके।"

कंपनी डीलिस्टिंग के नियम भी होंगे आसान 

उन्होंने कहा कि LODR फ्रेमवर्क की अभी समीक्षा हो रही है। रेगुलेटर ग्लोबल गवर्नेंस और डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट्स को देखते हुए इसमें बदलाव करना चाहता है। उन्होंने कहा कि हम डीलिस्टिंग फ्रेमवर्क की भी समीक्षा करेंगे। अच्छी तरह से विकसित कैपिटल मार्केट्स में सही तरीके से एंट्री और एग्जिट के रास्ते होने चाहिए।

कैपिटल मार्केट्स का अट्रैक्शन बढ़ाने पर सेबी का फोकस

पिछले कुछ सालों में सेबी का फोकस कैपिटल मार्केट्स को इनवेस्टर्स के लिए ज्यादा एफिशिएंट और अट्रैक्टिव बनाने पर रहा है। इसके लिए रेगुलेटर ने एक के बाद एक कई बड़े रिफॉर्म्स किए हैं। इनमें फास्टर ट्रेड सेटलमेंट्स और फॉरेन इनवेस्टर्स का आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस शामिल हैं।

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2024 में फिक्स्ड प्राइस रूट के जरिए डीलिस्टिंग की इजाजत

रेगुलेटर ने 2024 में फिक्स्ड प्राइस रूट के जरिए कंपनियों की डीलिस्टिंग की इजाजत दी थी। इसमें शेयरहोल्डर्स को पहले से तय एग्जिट प्राइस ऑफर किया जाता है। यह रिवर्स बुक-बिल्डिंग प्रोसेस का विकल्प है, जिसमें एग्जिट प्राइस इनवेस्टर्स बिड्स से तय होता है। सेबी ने पिछले साल उन सरकारी कंपनियों के लिए स्वैच्छिक डीलिस्टिंग फ्रेमवर्क को मंजूरी दी थी, जिनमें कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी 90 फीसदी से ज्यादा है।

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