सेबी ने बेसिक सर्विसेज डीमैट अकाउंट (बीएसडीए) में रखे सिक्योरिटीज की वैल्यू की लिमिट बढ़ाने का प्लान बनाया है। फाइनेंशियल इनकल्यूजन को बढ़ावा देने के लिए 2012 में बीएसडीए की शुरुआत हुई थी। अभी यह नियम है कि बीएसडीए में 2 लाख रुपये मूल्य तक की डेट सिक्योरिटीज रखी जा सकती है। इसके अलावा 2 लाख रुपये मूल्य की दूसरी सिक्योरिटीज (डेट सिक्योरिटीज छोड़कर) भी इस अकाउंट में रखी जा सकती है। अब मार्केट रेगुलेटर ने इस लिमिट को बढ़ाकर 10 लाख रुपये करने का प्लान बनाया है।
बेसिक डीमैट अकाउंट का मतलब क्या है?
Basic Services Demat Account का मतलब ऐसे डीमैट अकाउंट से है, जो ऐसे रिटेल निवेशक के लिए होता है जो स्टॉक्स, बॉन्ड्स, ईटीएफ, म्यूचुअल फंड्स आदि में नियमति रूप से निवेश नहीं करते। इस अकाउंट की मेंटेनेंस कॉस्ट कम होती है। सेबी ने बेसिक सर्विसेज डीमैट अकाउंट (BSDA) में सिक्योरिटीज की वैल्यू लिमिट बढ़ाने को लेकर एक कंसल्टेशन पेपर 5 जून को जारी किया है। उसने पूछा है कि क्या 10 लाख रुपये की नई लिमिट डेट और नॉन-डेट सिक्योरिटीज के लिए होना चाहिए या दोनों कैटेगरीज के लिए अलग-अलग लिमिट तय करना ठीक रहेगा?
सेबी क्यों बढ़ाने जा रहा है लिमिट?
पेपर में यह भी कहा गया है कि पिछले दशक में बेंचमार्क सूचकांकों की ग्रोथ और सिक्योरीटीज मार्केट में रिटेल इनवेस्टर्स का पार्टिसिपेशन बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया है। रेगुलेटर बीएसडीए के मेंटेनेंस चार्ज पर भी विचार कर रहा है। अभी अकाउंट में 1 लाख रुपये तक की डेट सिक्योरिटीज और 50,000 रुपये की नॉन-डेट सिक्योरिटीज होने पर ब्रोकरेज फर्म कोई फीस नहीं लेती है। इस लिमिट को बढ़ाकर 4 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है।
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रेगुलर अकाउंट के लिए कितना चार्ज?
ऐसे डीमैट अकाउंट जिनमें रखे सिक्योरिटीज की वैल्यू 4 लाख रुपये से 10 लाख रुपये होगी, उनकी मेंटेनेंस फीस 100 रुपये तय करने का प्रस्ताव है। ऐसे अकाउंट जिसमें 10 लाख रुपये से ज्यादा वैल्यू की सिक्योरिटीज होंगी, उन्हें रेगुलेटर अकाउंट माना जाएगा। इस पर रेगुलेटर एएमसी चार्ज वसूला जाएगा।