Crude Oil Price: तेल की कीमतों में आएगी नरमी? OPEC+ ने उत्पादन बढ़ाने का लिया फैसला

Crude Oil Price: OPEC+ ने जून 2026 में तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है, जो UAE के बाहर होने के बाद पहला कदम है। इससे सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों पर असर पड़ सकता है। जानिए इसके पीछे के कारण और बाजार पर प्रभाव।

अपडेटेड May 03, 2026 पर 10:15 PM
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UAE लंबे समय तक ओपेक का हिस्सा रहा है।

ओपेक+ समूह ने रविवार को ऐलान किया कि वह जून महीने में तेल उत्पादन 1.88 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाएगा। इस महीने की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के गठबंधन से बाहर होने के बाद यह पहला बड़ा फैसला है।

CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, ओपेक ने अपने बयान में कहा कि यह कदम अप्रैल 2023 में उत्पादन को नियंत्रित रखने के फैसले की ही आगे की कड़ी है। समूह ने कहा कि तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए सात देशों ने मिलकर उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है।

किन देशों पर लागू होगा फैसला


यह उत्पादन बढ़ोतरी सात देशों- सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान पर लागू होगी। 1 मई को बाहर होने के बाद UAE इस फैसले का हिस्सा नहीं है।

जून के लिए तय की गई 1.88 लाख बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी, मई में हुए 2.06 लाख बैरल प्रतिदिन के इजाफे से थोड़ी कम है। ये दोनों फैसले अपनी मर्जी से उत्पादन घटाने या बढ़ाने की नीति के तहत लिए गए हैं।

UAE के बाहर होने के बाद पहला फैसला

UAE इस गठबंधन का एक बड़ा उत्पादक था। वह 1 मई को औपचारिक रूप से ओपेक+ से अलग हो गया। देश के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला उसकी उत्पादन नीति और क्षमता की समीक्षा के बाद लिया गया है।

UAE लंबे समय तक ओपेक का हिस्सा रहा है और हाल तक सऊदी अरब और इराक के बाद तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था। इसके बाहर होने से अब गठबंधन की संरचना में बदलाव आया है।

क्षेत्रीय तनाव का असर

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बना हुआ है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच 28 फरवरी से चल रहे तनाव के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया में तेल और गैस सप्लाई का अहम रास्ता है। भी शिपिंग प्रभावित हुई है। इससे खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई पर असर पड़ा है।

OPEC+ की रणनीति क्या है

ओपेक+ 2023 से बाजार के हालात के हिसाब से उत्पादन को नियंत्रित करने की रणनीति अपना रहा है। इसमें जरूरत के हिसाब से उत्पादन घटाना या धीरे-धीरे बढ़ाना शामिल है।

जून में किया गया यह उत्पादन बढ़ाने का फैसला भी इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि बाजार में संतुलन बना रहे और सप्लाई सुचारू बनी रहे।

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