सेबी के बोर्ड की बैठक में आज (18 दिसंबर) संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियों की जांच के लिए सख्त नियमों पर चर्चा हो सकती है। सख्त नियमों से सेबी को फ्रॉड के मामलों की जांच में मदद मिलेगी। अभी ऐसे मामलों की जांच के लिए जो नियम हैं, वे ज्यादा सख्त नहीं हैं। अभी सेबी संदिग्ध गतिविधियों वाले किसी मामले की जांच तभी कर सकता है, जब उसके पास इस बात के पक्के सबूत होंगे कि एनटिटी फ्रॉड या अनुचित गतिविधियों में शामिल रही है।
पिछले साल पेश किया था प्रस्ताव
SEBI ने संदिग्ध गतिविधियों वाले मामलों की जांच के लिए पिछले साल प्रस्ताव पेश किया था। इस बारे में मार्केट रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया था। इसमें कहा गया था कि अक्सर फ्रॉड करने वाले एडवान्स टूल्स और टेक्नोलॉजी की मदद से अपने गलत कामों को छिपाने में सफल हो जाते हैं। इसलिए मौजूदा नियमों को सख्त बनाने की जरूरत है। इससे फ्रॉड के ऐसे मामलों को पकड़ने में मदद मिलेगी, जो अभी कमजोर रेगुलेशन की वजह से मार्केट रेगुलेटर की जांच से बच जाते हैं।
फ्रॉड करने वाले नई टेक्नोलॉजी का कर रहे इस्तेमाल
मार्केट रेगुलेटर ने इस बारे में पिछले साल मई में एक डिसक्शन पेपर इश्यू किया था। इसमें कहा गया था कि फ्रॉड से जुड़ी गतिविधियां चलाने के लिए नए तरीकों का इस्तेमाल हो रहा है। इनमें फ्रॉड करने वाले अपनी पहचान और उन एनटिटी से अपने कनेक्शंस और रिलेशन छुपा लेते हैं, जो ऐसी गतिविधियों में शामिल होती हैं। इसके लिए फेसटाइम, व्हाट्सअप, BOTIM जैसे एनक्रिप्टेड इलेक्ट्रिॉनिक मीडिया के जरिए कम्युनिकेशन होता है। इस वजह से कॉल डेटा रिकॉर्ड्स और बैंक रिकॉर्ड की जांच जैसे ट्रेडिशनल तरीके बेअसर साबित होते हैं।
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जांच के लिए ठोस सबूत की जरूरत नहीं पड़ेगी
सेबी के पेपर में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित नियमों के लागू हो जाने पर असामान्य ट्रेडिंग पैटर्न से जुड़े मामलों की भी जांच की जा सकती है। मार्केट रेगुलेटर को जांच शुरू करने के लिए ठोस सबूत की जरूरत नहीं रह जाएगी। सेबी के सर्विलांस सिस्टम की मदद से इनसाइडर ट्रेडिंग और फ्रंट रनिंग के मामलों का पता लगाया जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में टेक्नोलॉजी में बदलाव से फ्रॉड करने वाले जिन नए तरीकों और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनमें सेंध लगाना सेबी के लिए मुश्किल साबित हो रहा है।