SEBI New Rule: गोल्ड-सिल्वर ETF की आज से बदल सकती है वैल्यू, SEBI ने लागू किए नए नियम

SEBI New Rule: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने आज 1 अप्रैल से गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन के तरीके में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) अपने पोर्टफोलियो में रखे फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की कीमत घरेलू (डोमेस्टिक) स्पॉट प्राइस के आधार पर तय करेंगे

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 1:42 PM
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SEBI New Rule: नए नियम से NAV (नेट एसेट वैल्यू) की गणना का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा

SEBI New Rule: सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने आज 1 अप्रैल से गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन के तरीके में बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। इस नए नियम के तहत अब म्यूचुअल फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) अपने पोर्टफोलियो में रखे फिजिकल गोल्ड और सिल्वर की कीमत घरेलू (डोमेस्टिक) स्पॉट प्राइस के आधार पर तय करेंगे।

यह बदलाव ETF निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अब NAV (नेट एसेट वैल्यू) की गणना का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा।

क्या बदला है?

अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF की वैल्यूएशन के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों का इस्तेमाल किया जाता था। खासतौर से लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) के AM फिक्सिंग प्राइस को आधार बनाया जाता था। इसके बाद इन कीमतों में करेंसी एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट ड्यूटी, टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट और अन्य फैक्टर जोड़कर अंतिम NAV तय किया जाता था।


लेकिन 1 अप्रैल से यह पूरी प्रक्रिया बदल गई है।

अब घरेलू स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी किए गए स्पॉट प्राइस का इस्तेमाल होगा। यह प्राइस “पोल्ड प्राइसिंग सिस्टम” के जरिए तय किए जाएंगे। वैल्यूएशन सीधे भारतीय बाजार की कीमतों से जुड़ा होगा। इससे NAV कैलकुलेशन ज्यादा सीधा और पारदर्शी हो जाएगा।

SEBI ने क्यों किया बदलाव?

SEBI का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य वैल्यूएशन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता लाना है। घरेलू एक्सचेंज की ओर से निर्धारित कीमतें रेगुलेटेड होती हैं और उन पर निगरानी रहती है। इसलिए यह निवेशकों के लिए ज्यादा भरोसेमंद मानी जा रही हैं।

इसके अलावा, अलग-अलग फंड हाउस द्वारा अलग-अलग तरीके से वैल्यूएशन करने की समस्या भी इस नए सिस्टम से खत्म हो जाएगी। यह फैसला म्यूचुअल फंड एडवाइजरी कमेटी की सिफारिशों और इंडस्ट्री से चर्चा के बाद लिया गया है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

इस बदलाव से निवेशकों को तुरंत कोई एक्शन लेने की जरूरत नहीं है, लेकिन उनके रिटर्न को मापने का तरीका जरूर बदल जाएगा। अब ETF का NAV घरेलू सोने-चांदी की कीमतों के ज्यादा करीब होगा। अंतरराष्ट्रीय कीमतों और स्थानीय कीमतों के बीच अंतर (डिस्क्रेपेंसी) कम दिखेगा। साथ ही अलग-अलग ETF स्कीम्स के बीच तुलना करना आसान होगा एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे लॉन्ग टर्म में ट्रैकिंग एरर (बेंचमार्क से अंतर) कम हो सकता है और निवेशकों को ज्यादा सटीक रिटर्न का अंदाजा मिलेगा।

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