SEBI ने अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए बनाए नियम, कंपनियों को तय समय में करना होगा गलत खबरों का खंडन

नए नियमों के तहत अब शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों को बाजार में फैली किसी भी खबर को लेकर तय समय में अपना पक्ष साफ करना होगा। सेबी ने कहा है कि अगर खबर गलत है तो कंपनियों को इसका खंडन करना होगा। सही है तो फिर इनकी पुष्टि करनी होगी। या कंपनी अपनी सफाई भी पेश कर सकती हैं

अपडेटेड Mar 29, 2023 पर 10:13 PM
स्टॉक मार्केट में निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए और पारदर्शिता लाने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने नए आदेश जारी किए हैं।

स्टॉक मार्केट में निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए और पारदर्शिता लाने के लिए मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) ने नए आदेश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत अब शेयर मार्केट में लिस्टेड कंपनियों को बाजार में फैली किसी भी खबर को लेकर तय समय में अपना पक्ष साफ करना होगा। सेबी ने कहा है कि अगर खबर गलत है तो कंपनियों को इसका खंडन करना होगा। सही है तो फिर इनकी पुष्टि करनी होगी। या कंपनी अपनी सफाई भी पेश कर सकती हैं।

सेबी ने यह आदेश आज 29 मार्च को जारी किया है। इसके अलावा, सेबी ने कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में होने वाले फैसलों को सामने लाने की टाइमलाइन को लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं।

टॉप 100 कंपनियों के लिए ये हैं नए नियम


आदेश के मुताबिक, मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 100 कंपनियों को बाजार में फैली अफवाहों को 1 अक्टूबर 2023 से वेरिफाई, कंफर्म या खंडन या स्पष्ट करना होगा। इतना ही नहीं, मार्केट कैप से हिसाब से टॉप 250 कंपनियों पर यह नियम 1 अप्रैल 2024 से लागू होगा।

डिसक्लोजर को लेकर भी बनाए गए नए नियम

इसके अलावा, सेबी ने यह भी कहा है कि इवेंट्स या सूचनाओं को सामने लाने के लिए भी एक सख्त टाइमलाइन होनी चाहिए। सेबी ने डिसक्लोजर से जुड़े नियमों के बारे में कहा कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग में से निकलने वाली सूचनाएं 30 मिनट के भीतर सामने लानी होगी। इसका मतलब है कि अब अहम जानकारियों को रोक कर नहीं रखा जा सकेगा। इसके साथ ही, लिस्टेड कंपनियों से जुड़ी सूचनाएं 12 घंटे के भीतर सामने रखनी होगी।

सेबी ने प्राइवेट इक्विटी फंडों को म्यूचुअल फंडों का स्पॉन्सर बनने की अनुमति देने के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को भी मंजूरी दी। इसके अलावा सेबी ने लिस्टेड कंपनियों द्वारा पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन (ESG) के खुलासे के नियमों के लिए अपनी मंजूरी दे दी है।

बोर्ड की बैठक के बाद जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सेबी ने लिस्टेड कंपनियों के बोर्डों में परमानेंट सीट वाले व्यक्तियों की प्रथा को खत्म करने का निर्णय लिया है। यह कदम कॉरपोरेट गवर्नेंस इकोसिस्टम को और बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।

आईपीओ को लेकर ये है नया नियम

सेबी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) में किए जाने वाले सेकेंडरी मार्केट ट्रांजेक्शन के लिए एक फंड-ब्लॉकिंग फैसिलिटी शुरू करेगा। इस उपाय का मकसद स्टॉक ब्रोकर्स द्वारा निवेशकों के पैसे का दुरुपयोग करने से बचाना है। स्टॉक ब्रोकर्स द्वारा धोखाधड़ी और बाजार के दुरुपयोग को रोकने के लिए नियामक एक फॉर्मल मैकेनिज्म भी स्थापित करेगा।

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