सेबी ने निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार में स्थिरता के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उसने इंडेक्स डेरिवेटिव्स फ्रेमवर्क को स्ट्रॉन्ग बनाने वाले उपाय करने का प्रस्ताव दिया है। इनमें एक्सचेंज के सिंगल बेंचमार्क इंडेक्स पर वीकली ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स की इजाजत, डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के न्यूनतम साइज को 3-4 गुना बढ़ाने, ऑप्शन प्रीमियम अपफ्रंट कलेक्ट करने और स्ट्राइक प्राइस की संख्या घटाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। मार्केट रेगुलेटर ने इस बारे में कंसल्टेशन पेपर 30 जुलाई को जारी किया है।
कॉन्ट्रैक्ट का साइज कई गुना बढ़ाने का प्लान
सेबी ने कंसल्टेंशन पेपर में वीकली ऑपशंस कॉन्ट्रैक्ट्स घटाने का भी प्रस्ताव दिया है। अभी ऐसे इंडेक्स आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स हैं जो रोजाना एक्सपायर होते हैं। सेबी एक्सचेंज के एक इंडेक्स के वीकली कॉन्ट्रैक्ट्स की इजाजत देने के पक्ष में है। अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है तो एक हफ्ते में दो एक्सपायरी होगी। सेबी ने कॉन्ट्रैक्ट का साइज कई गुना बढ़ा देना चाहता है। इससे रिटेल इनवेस्टर्स के लिए डेरिवेटिव ट्रेडिंग में पार्टिसिपेट करना मुश्किल हो जाएगा।
अभी कॉन्ट्रैक्ट साइज 5 लाख से 10 रुपये के बीच
सेबी डेरिवेटिव ट्रेडिंग में रिटेल इनवेस्टर्स के बढ़ते पार्टिसिपेशन पर कई बार चिंता जता चुका है। उसका मानना है कि मार्केट क्रैश करने पर ऐसे रिटेल इनवेस्टर्स को भारी लॉस हो सकता है। अभी कॉन्ट्रैक्ट का न्यूनतम साइज 5 लाख से 10 लाख रुपये है। इसे 2019 में तय किया गया था। सेबी पहले इसे बढ़ाकर 15 लाख-20 लाख करना चाहता है। फिर इसे बढ़ाकर 20 लाख-30 लाख रुपये करने की है।
वर्किंग कमेटी की सिफारिशों पर बदलाव
मनीकंट्रोल ने 9 जुलाई को खबर दी थी कि सेबी इंडेक्स डेरिवेटिव फ्रेमवर्क में बदलाव करने के बारे में सोच रहा है। ये बदलाव फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस पर वर्किंग कमेटी की सिफारिशों पर आधारित होंगे। सेबी ने पिछले महीने बहुत ज्यादा स्पेकुलेशन की समस्या से निपटने के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। पिछले कुछ सालों में डेरिवेटिव ट्रेड में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी काफी बढ़ी है।
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प्रीमियम के अपफ्रेंट कलेक्शन के नियम में भी बदलाव की तैयारी
सेबी ऑप्शन प्रीमियम के अपफ्रंट कलेक्शन में भी बदलाव करना चाहता है। अभी ट्रेड्स के लिए 100 फीसदी मार्जिन का अपफ्रंट कलेक्शन अनिवार्य है। ऑप्शन प्रीमियम (या ऑप्शन का प्राइस) के अपफ्रेंट कलेक्शन के लिए कोई स्पष्ट शर्ते नहीं है। सेबी के कंसल्टेशन पेपर में पूरे प्रीमियम के अपफ्रेंट पेमेंट की बात कही गई है। सेबी ने स्ट्राइक प्राइस के सस्ते ऑप्शन पर दांव लगाने के प्रैक्टिस पर भी अंकुश लगाना चाहता है। इसके लिए स्ट्राइक प्राइस की संख्या घटाने का प्रस्ताव है।