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इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स को AI टूल के इस्तेमाल के बारे में क्लाइंट्स को बताना होगा, SEBI ने पेश किया प्रस्ताव

सेबी का मानना है कि इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट्स अगर अपने एआई टूल्स के इस्तेमाल के बारे में क्लाइंट्स को बताते हैं तो इससे पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे क्लाइंट्स यह जान सकेंगे कि निवेश के उनके फैसलों में एआई टूल्स का कितना कंट्रिब्यूशन है

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 15, 2024 पर 4:55 PM
इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स को AI टूल के इस्तेमाल के बारे में क्लाइंट्स को बताना होगा, SEBI ने पेश किया प्रस्ताव
सेबी ने अपने कंसल्टेशन पेपर में कहा है कि ये AI टूल कनवर्सेशन के दौरान संवेदनशील डेटा को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकते।

सेबी ने रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। इसमें कहा गया है कि अगर वे अपनी सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें इसके बारे में अपने क्लाइंट्स को बताना होगा। सेबी ने सिक्योरिटी को ध्यान में रख यह प्रस्ताव पेश किया है। यह क्लाइंट्स के हित में है। इससे वह जान सकेंगे कि निवेश के उनके फैसलों में एआई टूल्स का कितना कंट्रिब्यूशन है। इससे वे इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स की एडवाइजरी सर्विसेज के बारे में भी सही फैसला ले सकेंगे।

सेबी ने अगस्त की शुरुआत में कंसल्टेशन पेपर पेश किया है

स्टॉक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म Tradejini के सीओओ त्रिवेश डी ने कहा कि अनजाने में डेटा लीक की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के मजबूत उपाय अपनाना जरूरी है। क्लाइंट को यह पता होना चाहिए कि निवेश के फैसलों में AI टूल का कितना इस्तेमाल हो रहा है। सेबी ने इस महीने की शुरुआत में इस बारे में एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया था। इसमें इनवेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट सर्विसेज में AI के बढ़ते इस्तेमाल के बारे में बताया गया था।

एआई टूल्स इनसान की तरह बातचीत करते हैं

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