निवेशकों से फ्रॉड के लिए SEBI रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के नाम का हो रहा इस्तेमाल, जानिए क्या है पूरा मामला

जालसाज सेबी में रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट या इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स के नामों का इस्तेमाल कर फर्जी प्रोफाइल बना रहे हैं। फिर, वे प्रोफाइल का इस्तेमाल निवेशकों से धोखाधड़ी के लिए करते हैं। उधर, सेबी के रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स को इस बारे में कुछ भी पता नहीं होता

अपडेटेड Sep 11, 2024 पर 12:15 PM
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कानून के जानकारों ने मनीकंट्रोल को बताया कि ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जब किसी निवेशक को इस धोखाधड़ी का पता चलता है तो वह सेबी के पास शिकायत करता है।

सेबी में रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स (आईए) और रिसर्च एनालिस्ट्स (आरए) को एक नई समस्या से जूझना पड़ रहा है। उनके नाम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर जालसाज निवेशकों को चूना लगा रहे हैं। इससे जुड़ी शिकायतों का निपटारा करने में सेबी रजिस्टर्ड आईए और आरए को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कानून के जानकारों ने मनीकंट्रोल को बताया कि ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जब किसी निवेशक को इस धोखाधड़ी का पता चलता है तो वह सेबी के पास शिकायत करता है। इसके लिए सेबी के ऑनलाइन सिस्टम स्कोर का इस्तेमाल हो रहा है। निवेशक शिकायत में रजिस्टर्ड आईए या आरए का नाम और फ्रॉड की डिटेल देता है।

सेबी रजिस्टर्ड एडवाइजर्स को इस फ्रॉड के बारे में पता नहीं होता

सेबी शिकायत मिलने के बाद रजिस्टर्ड इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स से इस बारे में पूछता है। फिर पता चलता है कि रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स को ऐसे मामलों के बारे में कुछ पता नहीं है। वे ऐसे मामलों की जानकारी मिलने पर हैरान रह जाते हैं। मनीकंट्रोल ने इस मामले के बारे में कुछ लीगल एक्सपर्ट्स से बातचीत की। रजिस्टर्ड आरए और आईए को सलाह देने वाले कंपनी सेक्रेटरी आनंद कनकनी ने कहा कि ऐसे फ्रॉड की जानकारी मिलते ही आरए को साइबर क्राइम पोर्टल, सेबी और बीएसई एडमिनिस्ट्रेशन एंड सुपरविजन (BASL) को इंफॉर्म करना चाहिए। इसके अलावा उन्हें अपने सभी क्लाइंट्स को भी इस बारे में बताना चाहिए।


ऐसे मामलों में FIR दर्ज कराना आवश्यक

सेबी रजिस्टर्ड आरए और आईए अपनी वेबसाइट और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अपने पेजेज पर भी इस बारे में बता सकते हैं। हालांकि, ऐसा करने से पहले उन्हें इस बारे में सेबी को इंफॉर्म करना होगा। कनकनी ने कहा कि निवेशकों के हित को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना जरूरी है। इससे रजिस्टर्ड आरए और आईए खुद को सेबी की कार्रवाई से भी बचा सकते हैं। सेबी ऐसे मामलों में यह देखता है कि रजिस्टर्ड आरए या आईए ने पुलिस में शिकायत की है या नहीं। इसलिए ऐसे मामलों में FIR दर्ज कराना उनके लिए बहुत जरूरी है।

सेबी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करता है

इकोनॉमिक लॉ प्रैक्टिस के पार्टनर विनोद जोसफ ने कहा कि सेबी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करता है, क्योंकि ऐसे मामले हो सकते हैं जिनमें इंटरमीडियरी ने ऐसे फ्रॉड को अंजाम देने के लिए थर्ड पार्टी से सहयोग किया हो। इंटरमीडियरी थर्ड पार्टी को अपने नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत दे सकता है और बदले में कुछ पैसा मांग सकता है। उन्होंने कहा कि सेबी इस बात का पता कैसे लगाएगा कि इंटरमीडियरी और जालसाजों में मिलीभगत नहीं है।

निवेशकों को ये सावधानियां बरतने की सलाह

कनकनी ने निवेशकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अक्सर फ्रॉड के ऐसे मामलों में क्लाइंट को ऐसे बैंक अकाउंट में पैसे डालने को कहा जाता है, जो इंटरमीडियरी से जुड़ा नहीं होता है। दूसरा, फ्रॉड करने वाले छोटी फीस लेकर निवेशकों से हाई रिटर्न का वादा करते हैं। इसलिए अगर कोई आरए या आईए हाई रिटर्न का वादा करता है तो निवेशक को सावधान हो जाना चाहिए।

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