सेबी ने 7 अगस्त को कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग (केएसबीएल) और उसके सीएमडी सी पार्थसारथी को 25 करोड़ रुपये चुकाने के लिए नोटिस भेजा है। यह पैसा 15 दिन के अंदर चुकाना होगा। यह मामला पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरूपयोग कर क्लाइंट्स के पैसे के घोटाले से जुड़ा है। इससे पहले मार्केट रेगुलेटर ने कंपनी पर पेनाल्टी लगाई थी। इसे नहीं चुकाने के बाद सेबी ने पेमेंट का यह नोटिस भेजा है। सेबी ने अप्रैल 2023 में केएसबीएल और पार्थसारथी को सिक्योरिटी मार्केट में किसी तरह का ट्रांजेक्शन करने पर सात साल के लिए रोक लगा दी थी। क्लाइंट्स के पैसे का घोटाला करने पर 21 करोड़ रुपये की पेनाल्टी भी लगाई थी।
पैसे नहीं चुकाने पर संपत्ति जब्त करेगा सेबी
सेबी ने केएसबीएल पर 13 करोड़ और पार्थसारथी पर 8 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई थी। सेबी ने एक नए नोटिस में केएसबीएल और पार्थसारथी को क्रमश: 15.21 करोड़ रुपये और 9.36 करोड़ रुपये का पेमेंट करने को कहा है। इसमें इंटरेस्ट और रिकवरी कॉस्ट शामिल है। इसका पेमेंट 15 दिन में करना होगा। पैसा नहीं चुकाने पर सेबी बैंक अकाउंट्स को अटैच कर और चल और अचल संपत्तियां बेचकर पैसा रिकवर करेगी। इसके अलावा पार्थसारथी को गिरफ्तार और हिरासत में भी लिया जा सकता है।
केएसबीएल ने क्लाइंट्स के पैसे का दुरुपयोग किया
यह मामला केएसबीएल के बड़े फंड जुटाने से जुड़ा है। कंपनी ने यह पैसा वित्तीय संस्थानों से जुटाया था। इसके लिए क्लाइंट्स के सिक्योरिटीज का इस्तेमाल किया गया था। इसके एवज में उन्हें इंटरेस्ट देने का वादा किया गया था। लेकिन, कंपनी ने इस पैसे का घोटाला किया। उसने इस केएसबीएल से जुड़ी कंपनियों पर खर्च किया। इसके चलते वह सिक्योरिटी और फंड लौटाने पर डिफॉल्ट कर गई।
घोटाले के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का इस्तेमाल किया गया
पिछले साल अप्रैल में पारित आदेश में सेबी ने पाया था कि केएसबीएल क्लाइंट्स की सिक्योरिटीज को गिरवी रख पैसे जुटा रही थी। इसके लिए उसने क्लाइंट्स के पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरूपयोग किया था। इस पैसे को उसने समूह की दूसरी कंपनियों पर खर्च किया था। इस दौरान उसने कई नियमों का उल्लंघन किया था।