सेबी का फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस नियमों को सख्त बनाने का फैसला, 20 नवंबर से लागू होंगे नए प्रावधान

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इंडेक्स डेरिवेटिव ढांचे को मजबूत करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है, ताकि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इन उपायों के तहत साप्ताहिक आधार पर एक्सपायरीज को भी घटाने का का फैसला किया गया है। हर एक्सचेंज को वीकली एक्सपायरी के साथ सिर्फ एक बेंचमार्क इंडेक्स के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स मुहैया कराने की अनुमति होगी

अपडेटेड Oct 01, 2024 पर 8:14 PM
Story continues below Advertisement
सेबी के मुताबिक, 1 फरवरी 2025 से बायर्स से ऑप्शन प्रीमियम की तत्काल वसूली की जाएगी।

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने इंडेक्स डेरिवेटिव ढांचे को मजबूत करने के लिए कई उपायों का ऐलान किया है, ताकि निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके। इन उपायों के तहत साप्ताहिक आधार पर एक्सपायरीज को भी घटाने का का फैसला किया गया है। हर एक्सचेंज को वीकली एक्सपायरी के साथ सिर्फ एक बेंचमार्क इंडेक्स के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स मुहैया कराने की अनुमति होगी।

रेगुलेटर ने इंडेक्स डेरिवेटिव की ट्रेडिंग की अनिश्चित प्रकृति को देखते हुए इन उपायों का ऐलान किया है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) ने डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग के लिए न्यूनतम राशि को 5-10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने का फैसला किया है और बाजार में इसकी शुरुआत होने पर इसका दायरा 15 लाख-20 लाख रुपये हो जाएगा।

मार्केट रेगुलेटर की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है, 'लॉट साइज को इस तरह से तय किया जाएगा कि रिव्यू के दिन डेरिवेटिव की कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू 15 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के दायरे में हो।' डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नए नियमों को 20 नवंबर से चरणों में लागू किया जाएगा। वीकली एक्सपायरीज के साथ इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स, कॉन्ट्रैक्ट साइज में बढ़ोतरी और टेल रिस्क कवरेज में बढ़ोतरी को इसी दिन से लॉन्च किया जाएगा।


1 फरवरी 2025 से बायर्स से ऑप्शन प्रीमियम की तत्काल वसूली की जाएगी और एक्सपायरी डे के दिन कैलेंडर स्प्रेड ट्रीटमेंट को हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2025 से पोजिशन लिमिट्स की इंट्रा डे मॉनिटरिंग होगी।

डेली एक्सपायरीज के लिए गुंजाइश नहीं

स्टॉक एक्सचेंज ऐसे कॉन्ट्रैक्ट ऑफर करते हैं, जिसमें हफ्ते के हर दिन एक्सपायरी होती है। मार्केट रेगुलेटर के कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि एक्सपायरी वाले दिन इंडेक्स ऑप्शंस में ट्रेडिंग काफी तेज रहती है और एवरेज होल्डिंग पोजिशन होल्डिंग पीरियड मिनटों में होता है। सेबी ने बताया, ' ये सभी बातें निवेशकों की सुरक्षा और बाजार की स्थिरता में बाधक हैं और इसके लॉन्ग टर्म में पूंजी के निर्माण में किसी तरह का फायदा नजर नहीं आता'। इस वजह से रेगुलेटर ने यह प्रावधान करने का फैसला किया है कि हर एक्सचेंज में हफ्ते में सिर्फ एक इंडेक्स के लिए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स हों।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।