बाजार नियामक SEBI ने इंडेक्स प्रोवाइडर्स के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने का फैसला किया है। इसके पीछे मकसद सिक्योरिटीज मार्केट में फाइनेंशियल बेंचमार्क्स की गवर्नेंस और एडमिनिस्ट्रेशन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। इसके साथ ही नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशंस (NPO) को सोशल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए फंड जुटाने में फ्लेक्सिबिलिटी उपलब्ध कराने का फैसला भी किया गया है। SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने 25 नवंबर को हुई मीटिंग में कई प्रस्तावों को मंजूरी दी।
सेबी ने कहा है कि एनपीओ की फंड रेजिंग के मामले में सोशल स्टॉक एक्सचेंज पर ‘जीरो कूपन जीरो प्रिंसिपल’ (ZCZP) बॉन्ड जारी करने वाले एनपीओ के लिए मिनिमम इश्यू साइज को 1 करोड़ रुपये से घटाकर 50 लाख रुपये कर दिया जाएगा।
SM REITS के लिए नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क
सेबी, स्मॉल एंड मीडियम रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट (SM REITS) की सुविधा के लिए एक नया रेगुलेटरी फ्रेमवर्क स्थापित करेगा। SM REITS पर सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने कहा कि इसका उद्देश्य बाजार को महत्वपूर्ण रूप से विस्तारित करने में मदद करना है ताकि अधिक खुदरा निवेशकों को REIT यूनिट्स में फ्रैक्शनल ओनरशिप मिल सके। बुच ने बोर्ड की मीटिंग के बाद कहा कि सेबी ऐसे और प्रोडक्ट बनाने पर विचार करने के लिए तैयार है।
इसके अलावा सेबी, अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड (AIFs) में पैसा लगाने वाले निवेशकों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मानदंडों में संशोधन करेगा। सेबी का कहना है कि संरक्षक की नियुक्ति का आदेश, वर्तमान में कैटेगरी III AIF की योजनाओं और 500 करोड़ रुपये से अधिक के कोष वाली कैटेगरी I और II AIF की योजनाओं पर लागू होता है, जिसे सभी AIF तक बढ़ाया जाएगा।
देश में मार्च 2024 तक 'T+0' सिस्टम यानी शेयरों के उसी दिन सेटलमेंट की व्यवस्था लागू हो सकती है। सेबी की चेयरपर्सन बुच ने कहा कि इसके लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। इसके बाद तत्काल सेटलमेंट को लेकर वैकल्पिक सिस्टम भी लाया जाएगा और ये दोनों समानांतर रूप से साथ-साथ चलेंगे।