शेयर बाजार में इन दिनों लगातार नई कंपनियां आ रही हैं। इनके इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPOs) में पैसा लगाने के लिए निवेशकों में भी होड़ मची है। सिर्फ इस हफ्ते (20 से 24 नवंबर) खुले 5 आईपीओ में निवेशकों ने 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाई थी। अब सेबी (SEBI) की चेयरपर्सन माधाबी पुरी बुच (Madhabi Puri Buch) ने रिटेल निवेशकों को इस होड़ से बचने और सतर्क रहने की सलाह दी है। सेबी चेयरपर्सन ने कहा कि IPO के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन निकालने का तरीका परफेक्ट नहीं होता है। ऐसे में सही रणनीति यह होगी कि रिटेल निवेशक इन कंपनियों के शेयर प्राइस को सेटल होने दे हैं और स्टॉक मार्केट के जरिए इसमें निवेश करें।
माधाबी पुरी बुच ने सेबी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की हुई एक बैठक के बाद मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए ये बाते कहीं।
उन्होंने कहा, "IPO में वैल्यूएशन तय करने का तरीका हमेशा सही नहीं होता है। यदि संस्थागत निवेशक को खरीदारी करनी है, तो उन्हें बड़ी खरीदारी करनी होगी... वे सेकेंडरी मार्केट में खरीदारी नहीं कर सकते। लेकिन रिटेल निवेशकों को तो छोटी मात्रा में शेयर खरीदने होते हैं। इसलिए बेहतर रणनीति यह है कि वे IPO के बाद कीमतों के स्थिर होने का इंताज करें। तिमाही नतीजे आदि देखें... और फिर सेकेंडरी मार्केट के जरिए निवेश करें।"
आईपीओ बाजार में भीड़ पर बुच ने कहा, "नियामक को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि हम अवसर से दूर हो सकते हैं, लेकिन बाजार में एक नैचरुल चेक एंड बैलेंस है। इनवेस्टमेंट बैंकर यह आकलन करते हैं, कि कहीं बाजार में अधिक भीड़ तो नहीं है।"
इससे पहले इस हफ्ते स्टॉक मार्केट में 5 कंपनियों के IPO खुले। सिर्फ टाटा टेक्नोलॉजीज के IPO को करीब 1.56 लाख करोड़ से अधिक बोली। यह आईपीओ करीब 69.43 गुना अधिक सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हुए। साथ ही इसने सबसे अधिक आवेदन मिलने के लिए भारतीय जीवन बीमा निमग (LIC) के आईपीओ के पिछले रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया।
टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा ग्रुप की कंपनी है। इस आईपीओ को लेकर इसलिए भी अधिक क्रेज दिखा क्योंकि टाटा ग्रुप करीब 20 सालों के बाद अपनी किसी कंपनी का IPO लाया था। टाटा ग्रुप ने आखिरी आईपीओ साल 2004 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का लाया था।