फॉरेन पोर्टफोलियो इनवेस्टर्स (एफपीआई) के लिए इंडिया में रजिस्ट्रेशन के नियम आसान हो सकते हैं। सेबी ने इस बारे में एक प्रस्ताव पेश किया है। इसमें एफपीआई के लिए रजिस्ट्रेशन के नियमों को आसान बनाने की बात कही गई है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो एफपीआई को रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई करने के वास्ते पहले से कम जानकारियां देनी होंगी।
कंसल्टेशन पेपर पर 15 अक्टूबर तक राय दी जा सकती है
SEBI ने 24 सितंबर को बताया कि उसने एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया है। इसका मकसद एफपीआई के रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को आसान बनाना है। सेबी ने इस पेपर के बारे में 15 अक्टूबर तक राय मांगी है। मार्केट रेगुलेटर ने कहा है, "यह देखा गया है कि कुछ खास कैटेगरी के एफपीआई के अप्लिकेंट्स की कुछ जानकारियां पहले से डिपॉजिटरीज के कॉमन अप्लिकेशन फॉर्म मॉड्यूल में होती हैं। इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।"
पहले से उपलब्ध जानकारियां दोबारा नहीं मांगी जाएंगी
मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि जो जानकारियां पहले से उपलब्ध हैं, उन्हें दोबारा देने में अप्लिकेंट्स का समय खराब होता है। साथ ही उसके रिव्यू में भी समय खर्च होता है। इसलिए सिर्फ ऐसी जानकारियां मांगने का प्रस्ताव है, जो आवेदक के बारे में पहले से उपलब्ध नहीं हैं। इससे पहले सेबी ने इस बारे में फीडबैक मांगा था कि क्या कॉमन अप्लिकेशन फॉर्म (CAF) के संक्षिप्त वर्जन का इस्तेमाल करने से अप्लिकेशन को रिव्यू करने में समय बचेगा और इससे पेजों की संख्या घटेगी। संक्षिप्त सीएएफ में सिर्फ ऐसी जानकारियों के लिए फील्ड होंगे, जो पहले से उपलब्ध नहीं हैं।
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अप्लिकेशन फॉर्म के संक्षिप्त वर्जन का होगा इस्तेमाल
सेबी ने फैसला लिया है कि कंसल्टेशन पेपर में बताए गए कुछ खास कैटेगरी के एफपीआई के लिए सीएएफ के संक्षिप्त वर्जन का इस्तेमाल होगा। मार्केट रेगुलेटर ने कहा है कि ऐसे अप्लिकेंट्स को सिर्फ ऐसे फील्ड भरने होंगे, जो यूनिक होंगे। बाकी फील्ड्स या तो पहले से उपलब्ध जानकारी के आधार पर ऑटो पॉपुलेटेड होंगे या उन्हें डिसेबल कर दिया जाएगा।