सेबी की तरफ से रिसर्च एनालिस्ट्स और इन्वेस्टमेंट के लिए लाइसेंस के नियमों में ढील देनें की तैयारी है। जानकारों का कहना है कि सेब का ये कदम रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए बड़ा तोहफा होगा। सेबी का कहना है कि देश में इस समय जितने इन्वेस्टर हो गए हैं उसकी तुलना में देश में काफी कम सेबी सर्टिफाइड रिसर्च एनालिस्ट्स हैं। जिसको ध्यान में रखते हुए रिसर्च एनालिस्ट्स और फाइनेंशियल एडवाइजर्स के लाइसेंस के लिए नियमों को आसान किया जाएगा।
सेबी ने जारी किया कंसल्टेशन पेपर
सेबी ने रिसर्च एनालिस्ट और इनवेस्टमेंट एडवाइजर के लिए नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा है। सेबी द्वारा जारी कंसल्टेशन पेपर में नियम आसान करने का प्रस्ताव रखा गया है। नए प्रस्ताव के मुताबिक इनवेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट के लिए न्यूनतम योग्यता अब ग्रेजुएशन होगी। अभी ये पोस्ट ग्रेजुएशन है।
न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त भी खत्म करने का प्रस्ताव
सेबी के अगले प्रस्ताव के मुताबिक इंडिविजुअल इनवेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट के लिए किसी अनुभव की जरूरत नहीं होगी। SEBI ने न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त भी खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। अब एक ही व्यक्ति इनवेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट दोनों के लाइसेंस ले सकता है। दूसरे कारोबार में लगे लोग पार्टटाइम लाइसेंस भी ले सकते हैं।
सिंपल ग्रैज्युएट भी बन सकेंगे फाइनेंशियल एडवाइजर्स
अब इनवेस्टमेंट एडवाइजर और रिसर्च एनालिस्ट दोनों ट्रेडिंग कॉल्स दे सकेंगे। रिस्क प्रोफाइलिंग के आधार पर “one to one” कॉल इनवेस्टमेंट एडवाइजर के दायरे में रहेगी और बिना रिस्क प्रोफाइलिंग के “one to many” कॉल RA के दायरे में रहेगी। सेबी के इन प्रस्तावों के लागू होने से अनरजिस्टर्ड एडवाइजर्स की लाइफ आसान होगी अब वे अपनी आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकेंगे। इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स और रिसर्च एनालिस्ट को डिग्री के बोझ से छुटकारा मिलेगा। अब सिंपल ग्रैज्युएट भी फाइनेंशियल एडवाइजर्स बन सकेंगे।