Sensex 60,000 अंक से नीचे बंद, लगातार दूसरे दिन चढ़ा बाजार

Sensex 60,000 का स्तर पार करने के बाद मुनाफावसूली की वजह से थोड़ा नीचे आ गया।कारोबार के अंत में यह 203 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 59,959 पर बंद हुआ

अपडेटेड Oct 28, 2022 पर 4:16 PM
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रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 2.15 फीसदी की मजबूती देखने को मिली। ओएनजीसी का शेयर 2.62 फीसदी ऊपर चल रहा था। REC के शेयरों में 3 फीसदी से ज्यादा उछाल दिखा, Bajaj Auto के शेयर 2.6 फीसदी की तेजी दिखा रहे थे।
     
     
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    Share Market Rally: घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार (28 अक्टूबर) को लगातार दूसरे दिन तेजी के साथ बंद हुए। बाजार खुलने के थोड़ी देर बाद ही BSE का 30 शेयरों वाला Sensex 60,000 अंक के पार निकल गया। लेकिन, कारोबार के अंत में यह इस लेवल से नीचे बंद हुए। RIL, मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) , बजाज ऑटो (Bajaj Auto) और ONGC के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली।

    Sensex 60,000 का स्तर पार करने के बाद मुनाफावसूली की वजह से  नीचे आ गया। कारोबार के अंत में यह 203 अंक यानी 0.34 फीसदी की तेजी के साथ 59,959 पर बंद हुआ। NSE का 50 शेयरों वाला निफ्टी 50 कारोबार के अंत में करीब 0.28 फीसदी यानी 49 अंक की मजबूती के साथ 17,786 रुपये पर रहा।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों में 3.09 फीसदी की मजबूती देखने को मिली। ओएनजीसी का शेयर 1.48 फीसदी ऊपर चल रहा था। REC के शेयरों में 3.83 फीसदी से ज्यादा उछाल दिखा, Bajaj Auto के शेयर 1.43 फीसदी चढ़कर बंद हुए। हालांकि, Tata Chemical के शेयरों में 4.73 फीसदी की गिरावट आई। SBI Card 5.44 फीसदी टूट गया। Jindal Steel के शेयरों में भी 3.18 फीसदी की बड़ी गिरावट दिखी।


    इन वजहों से बाजार में आई तेजी:

    दूसरी तिमाही के अच्छे नतीजे

    अब तक आए कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजे काफी अच्छ रहे हैं। खासकर बैंकों का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में शानदार रहा है। एक तरफ जहां उनका मुनाफा बढ़ा है, वही दूसरी तरफ उनके एनपीए में कमी आई है। टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे हैं। उनके बिजनेस पर अभी अमेरिका और यूरोप में मंदी का ज्यादा असर देखने को नहीं मिला है। उधर, अमेरिका में टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रदर्शन में कमजोरी देखने को मिली है। इस वजह से उनके शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है।

    रुपये में मजबूती

    डॉलर के मुकाबले रुपया 83 का लेवल पार कर गया था। उसके बाद इसमें मजबूती देखने को मिली है। 28 अक्टूबर को यह डॉलर के मुकाबले मजबूत खुला। डॉलर इंडेक्स कई दशकों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। इस वजह से दुनिया की प्रमुख करेंसी में डॉलर के मुकाबले कमजोरी आई है। हालांकि, रुपया दूसरी करेंसी के मुकाबले कम गिरा है।

    RBI के रुख में नरमी की उम्मीद

    RBI इस साल मई से अब तक रेपो रेट 1.90 फीसदी बढ़ा चुका है। माना जा रहा है कि आगे उसके रुख में थोड़ी नरमी देखने को मिल सकती है। इस साल के अंत तक इंटरेस्ट रेट में आखिरी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यह मार्केट के लिए राहत की खबर है। आरबीआई अगले साल इनफ्लेशन के 6 फीसदी पर आ जाने की उम्मीद जता चुका है। यह उसकी टारगेट रेंज के करीब होगा।

    इंडियन इकोनॉमी की अच्छी सेहत

    दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। इधर, इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ पॉजिटिव बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनियाभर में इंडियन इकोनॉमी उम्मीद की किरण जैसी है। इस साल और अगले साल इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ दुनिया में सबसे ज्यादा रहेगी। इसकी वजह यह है कि इंडिया में इकोनॉमी की बुनियादी स्थिति अच्छी है।

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