Market news: भारतीय बाजार ने 15 दिसंबर को भी अपना रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन जारी रखा है। बीएसई का सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 71,000 अंक और निफ्टी 50 इंडेक्स 21,300 अंक से ऊपर जाता दिखा। 2024 के लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नरम रुख ने निवेशकों की उम्मीदों को इतना बढ़ा दिया है कि उन्होंने बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कठोर टिप्पणियों को भी नजरअंदाज कर दिया है। भारत के मजबूत फंडामेंटल्स विदेशी निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। कमजोर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में कमी से भी बाजार को सपोर्ट मिला है।
इस हफ्ते अब तक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में 9,600 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 485.1 करोड़ रुपये के स्टॉक खरीदे हैं। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निकट भविष्य में भारत में FIIs की खरीदारी जारी रहेगी। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के वीके विजयकुमार का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट से उभरते बाजारों, खासकर भारत में बड़े विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि लार्जकैप फाइनेंशियल्स और आईटी का वैल्यूएशन ज्यादा अच्छा लग रहा है ऐसे में ये एफआईआई के पसंदीदा सेक्टर होंगे।
फेड द्वारा 2024 में दरों में कई कटौती के संकेत के बाद, बैंकिंग और आईटी शेयर ईजी मनी पॉलिसी और मांग में सुधार की उम्मीद से उत्साहित हैं। 15 दिसंबर को कारोबारी सत्र के पहले घंटे में, बीएसई फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स 10,498 के अपने ऑलटाइम हाई पर पहुंच गया। जबकि बीएसई आईटी ने 35,398 पर स्थित अपने 52-वीक हाई को हिट किया।
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए विलियम ओ नील के इक्विटी रिसर्च के हेड मयूरेश जोशी ने कहा कि अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद से आईटी सेक्टर की मांग और ऑर्डर बुक में सुधार की उम्मीद है जिनमें पिछली कुछ तिमाहियों से ठहराव देखने को मिल रहा था।
उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में आगे कहा कि ऑर्डरों की संख्या में बढ़त और पॉजिटिव करेंसी मूवमेंट से आईटी कंपनियों के मार्जिन में बढ़ोतरी होगी। मजबूत ग्रोथ की संभावना और अच्छे वैल्यूएशन के चलते लार्जकैप की तुलना में साइएंट और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स जैसी मिडकैप आईटी कंपनियां ज्यादा अच्छी लग रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लार्जकैप आईटी कंपनियों चुनिंदा कॉल लेने में एक और तिमाही का समय लगेगा।
दूसरी ओर नियोट्रेडर के को-फाउंडर राजा वेंकटरमन ने मनीकंट्रोल से कहा कि बैंकों को इस तेजी में भाग लेना चाहिए। बैंक निफ्टी के 46,000 के स्तर को पार करने के बाद इसमें और तेजी आने की उम्मीद दिख रही है। हमें निकट अवधि में बैंकिंग शेयरों में रैली जारी रहने की उम्मीद दिख रही है।
बबल जोन में ब्रॉडर मार्केट
बीएसई स्मॉलकैप और मिडकैप सूचकांकों ने तेजी का दौर जारी रखते हुए 42,147 और 36,421 का नया हाई हिट किया है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रेडर्स छोटे-मझोले शेयरों में अतिउत्साह दिखा रहे हैं। वीके विजयकुमार का कहना है कि ब्रॉडर मार्केट का वैल्यूएशन महंगा हो गया है ओर यह बबल जोन में जा रहा है। अगर हाई वैल्यूएशन की स्थिति में कोई अप्रत्याशित घटना होती है तो ब्रॉडर मार्केट में जोरदार गिरावट होगी। उन्होंने कहा, "ब्रॉडर मार्केट में निवेशित रहते हुए भी निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।"
हालांकि यूएस फेड के रुख में नरमी आई है लेकिन यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) और बैंक ऑफ इंग्लैंड (बीओई) ने एक कठोर नजरिया साझा करते हुए कहा कि इनकी कड़ी मौद्रिक नीति तब तक बनी रहेगी जब तक स्थिति की मांग होगी। हालांकि, दोनों बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
इस पर अपनी राय देते हुए आईडीबीआई कैपिटल के रिसर्च हेड एके प्रभाकर ने कहा कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड के रवैए कोई खास महत्व नहीं है। उन्होंने कहा, "जब भगवान (यूएस फेड) ने नरमी अपनाने की बात कर रहा है, तो दूसरे केंद्रीय बैंक भी इसका अनुसरण करेंगे ही।"
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