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क्लोजिंग से ठीक 45 मिनट पहले फिसला बाजार, आखिर भारतीय बाजारों में तेजी क्यों नहीं टिक रही?

बाजार में तेजी टिक नहीं पा रही है। इसकी वजह मुनाफावसूली है। बाजार में रिकवरी आते ही वैसे इनवेस्टर्स एक्टिव हो जाते हैं जो ऊंचे लेवल पर फंसे हुए हैं। वे अपने लॉस को कम करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते। खासकर लॉन्ग पोजीशन वाले इनवेस्टर्स पर यह बात ज्यादा लागू होती है

Edited By: Rakesh Ranjanअपडेटेड Jun 11, 2026 पर 6:11 PM
क्लोजिंग से ठीक 45 मिनट पहले फिसला बाजार, आखिर भारतीय बाजारों में तेजी क्यों नहीं टिक रही?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजारों में अगले कुछ समय तक कंसॉलिडेशन दिख सकता है।

शेयर बाजार में 11 जून को जैसा नाटकीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला, उसने ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स को हैरान कर दिया। सुबह में बाजार के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी कमजोर खुले। 11:30 बजे दोनों में तेज रिकवरी आई। 12:30 बजे तक सेंसेक्स 74,373 के हाई लेवल पर पहुंच गया। निफ्टी भी 23,322 पर पहुंच गया। लेकिन, कारोबार खत्म होने से करीब 45 मिनट पहले दोनों सूचकांकों ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी। निफ्टी 0.23 फीसदी यानी 53 अंक गिरकर 23,161 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.20 फीसदी यानी 150 अंक की कमजोरी के साथ 73,832 पर क्लोज हुआ।

हर तेजी पर दिख रही मुनाफावसूली

आखिर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव की क्या वजह है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में तेजी टिक नहीं पा रही है। इसकी वजह मुनाफावसूली है। बाजार में रिकवरी आते ही वैसे इनवेस्टर्स एक्टिव हो जाते हैं जो ऊंचे लेवल पर फंसे हुए हैं। वे अपने लॉस को कम करने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते। खासकर लॉन्ग पोजीशन वाले इनवेस्टर्स पर यह बात ज्यादा लागू होती है। बाजार बंद होने के ठीक 45 मिनट पहले सूचकाकों का लाल निशान में आना इस बात का संकेत है।

दूसरे एशियाई बाजारों से पिछड़ा भारत

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