Market Updates: इंडियन शेयर मार्केट्स में 23 सितंबर (शुक्रवार) को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। बाजार के प्रमुख सूचकांक Sensex और निफ्टी 1.5 फीसदी से ज्यादा गिर गए। 23 सितंबर को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1020 अंक यानी 1.73 फीसदी गिरकर 58,098.92 अंक पर बंद हुआ। NSE का 50 शेयरों वाला NIFTY 50 भी 1.72 फीसदी यानी 32 अंक गिरकर कारोबार के अंत में 17,327 अंक पर रहा।
सबसे ज्यादा गिरावट पावर, रियल्टी और बैंक शेयरों में आई। सभी सेक्टर के सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। कैपिटल गुड्स, पावर, रियल्टी और बैंक सूचकांक 2-3 फीसदी गिरकर बंद हुए।
सिर्फ 959 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि 2417 शेयर गिरकर बंद हुए। 106 शेयरों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। सबसे ज्यादा 7.9 फीसदी की गिरावट Power Grid Corporation के शेयरों में आई। Apollo Hospitals, Hindalco Industries, Adani Ports और SBI के शेयर निफ्टी में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।
आज आई गिरावट के बाद बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 276.6 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। इससे इनवेस्टर्स की करीब 4.9 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए।
ICICI Securities के मुताबिक, फेडरल रिजर्व जिस तरह इंटरेस्ट रेट बढ़ा रहा है, उसका अमेरिकी इकोनॉमी की ग्रोथ पर खराब असर पड़ना तय है। इससे फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की दूसरी तिमाही में अमेरिकी इकोनॉमी मंदी में जा सकती है। उधर, फेडरल रिजर्व यह कह चुका है कि वह इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए अमेरिकी इकोनॉमी में मंदी को बर्दाश्त कर सकता है।
इस हफ्ते बुधवार को फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट 0.75 फीसदी बढ़ा दिया। उसने आगे हाई इनफ्लेशन और इकोनॉमी में सुस्ती का अनुमान जताया है। इस वजह से
इन वजहों से शेयर बाजारों में आई गिरावट:
फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख
इस हफ्ते बुधवार को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इंटरेस्ट रेट 0.75 फीसदी बढ़ा दिया। उसने कहा कि इंटरेस्ट रेट में वृद्धि का सिलसिला जारी रहेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि फेड नवंबर में इंटरेस्ट रेट में 0.75 फीसदी और दिसंबर में 0.50 फीसदी वृद्धि कर सकता है। वह अंतिम बार फरवरी में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है। इसका सीधा ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ पर पड़ेगा।
इंडिया में RBI ने भी अपना रुख कड़ा कर दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वह मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की अगली बैठक में इंटरेस्ट रेट में 0.50 फीसदी वृद्धि कर सकता है। दिसंबर में भी वह इंटरेस्ट रेट 0.35 फीसदी बढ़ा सकता है। केंद्रीय बैंक अगले साल भी इंटरेस्ट रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है। इससे अगले साल अप्रैल तक रेपो रेट बढ़कर 6.75 फीसदी पर पहुंच जाएगा। RBI की MPC की बैठक 28-30 सितंबर को होने वाली है।
पिछले 40 महीनों में पहली बार बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी में कमी आई है। लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए RBI ने वेरिएबल रेट रेपो (VRR) के तहत गुरुवार को 50,000 करोड़ रुपये के ऑक्शन किए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एडवान्स टैक्स डिपॉजिट से सिस्टम से पैसे निकलने, क्रेडिट डिमांड बढ़ने और डिपॉजिट ग्रोथ में कमी की वजह से लिक्विडिटी घटी है।
इंडियन मार्केट में शेयरों की कीमतें बढ़ने से वैल्यूएशन बहुत हाई लेवल पर पहुंच गया है। बीएनपी पारिबा ने कहा है कि ग्लोबल और एशियाई शेयरों के मुकाबले इंडियन शेयरों का प्रीमियम वैल्यूएशन टिकाऊ नहीं है। बाजार को सपोर्ट देने वाले फैक्टर्स के अभाव में बीएनबी ने इनवेस्टर्स को इंडियन शेयरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
इंडियन इकोनॉमी की कम ग्रोथ
कई एजेंसियों ने इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ के अपने अनुमान घटा दिए हैं। जून तिमाही के जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े उम्मीद के मुकाबले कम रहे हैं। Asian Development Bank (ADB) ने इस फाइनेंशियल ईयर में इंडिया की ग्रोथ के अनुमान को 7.8 फीसदी से घटाकार 7 फीसदी कर दिया है। मूडीज ने कैलेंडर ईयर 2022 में इंडिया की ग्रोथ के अनुमान को 8.8 फीसदी से घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया है।