Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 18 जुलाई को लगातार 7वें दिन गिरावट जारी रही। खासतौर से आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे पूरे मार्केट का सेंटीमेंट कमजोर दिखा। कारोबार के अंत में, बीएसई सेंसेक्स 241.30 अंक या 0.31 फीसदी की गिरावट के साथ 77,339.01 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 78.90 अंक या लुढ़ककर 23,453.80 के स्तर पर बंद हुआ। इसके चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप शुरुआती कारोबार में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये घट गया। यह फरवरी 2023 के बाद शेयर बाजार में आई अब तक कि सबसे लंबी गिरावट है। सेंसेक्स और निफ्टी में 26 सितंबर के बाद से अबतक करीब 11 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
आइए जानते हैं कि शेयर बाजार में इस गिरावट के पीछे 5 प्रमुख कारण क्या रहे-
1. अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बने रहने की आशंका
बाजार में गिरावट का दूसरा सबसे अहम कारण कंपनियों के खराब तिमाही नतीजे हैं। हीरो मोटोकॉर्प, मामाअर्थ सहित तमाम कंपनियों के शेयर आज खराब तिमाही नतीजों के चलते भारी दबाव में दिखे। अब तक जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे आए हैं, उनमें से आधे से अधिक ने बाजार को निराश किया है। इसके चलते इन शेयरों को रेटिंग में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। कई एनालिस्ट्स तो अर्निंग्स ग्रोथ में गिरावट को देखते हुए सुस्ती की भी आशंका जताने लगे हैं।
3. FIIs की ओर से लगातार बिकवाली
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने शेयर बाजार पर दबाव बनाए हुआ है। नवंबर महीने में विदेशी निवेशक अब तक 29,533 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अक्टूबर में भी 1 लाख करोड़ से अधिक की रिकॉर्ड बिकवाली की है। इस गिरावट के पीछे ऊंचा वैल्यूएशन, भूराजनैतिक तनाव और चीन के नए प्रोत्साहन पैकेज सहित कई कारण हैं।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट का वैल्यूएशन अभी भी ऊंचा बना हुआ है। ऐसे में अभी इस सेगमेंट में और बिकवाली देखने को मिल सकती है। हालांकि उनका कहना है कि लार्जकैप में गिरावट थमने की ओर है। फिडेंट एसेट मैनेजमेंट के डायरेक्टर ऐश्वर्या दाधीच ने कहा, "बाजार के सेंटीमेंट में जोश नहीं दिख रहा। निफ्टी और ब्राडर मार्केट दोनों पर बहुत दबाव है। हालांकि मिड-स्मॉल कैप इंडेक्सों में ऊंचे वैल्यूएशन के चलते आगे भी दर्द देखने को मिल सकता है, लेकिन मुख्य इंडेक्स में गिरावट काफी हद तक खत्म हो सकता है।"
5. महंगाई दर में फिर उछाल
खुदरा महंगाई दर अक्टूबर में RBI के 6 फीसदी के लक्ष्य को पार करके 14 महीने के उच्चतम पर पहुंच गई। होलसेल इंफ्लेशन भी 2 प्रतिशत से ऊपर लौट आया, जो इसका 4 महीनों का उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ में सुस्ती के बीच महंगाई दर में इजाफे ने चिंता और बढ़ा दी है।
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