Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 6 कारणों से त्राहिमाम, सेंसेक्स 1,500 अंक टूटा, निफ्टी 23200 के नीचे

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,500 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 23,200 के भी नीचे चला गया। FMCG इंडेक्स को छोड़कर निफ्टी के बाकी सभी 15 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए

अपडेटेड Mar 13, 2026 पर 3:42 PM
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Share Market Crash: बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे तेज बिकवाली देखने को मिली

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,500 अंकों तक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 23,200 के भी नीचे चला गया। FMCG इंडेक्स को छोड़कर निफ्टी के बाकी सभी 15 प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है। मिडिल ईस्ट में जंग खत्म न होने के संकेत ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 468.70 अंक या 1.98 प्रतिशत गिरकर 23,170.45 के स्तर पर पहुंच गया।

इस सप्ताह अब तक सेंसेक्स करीब 4.5 प्रतिशत और निफ्टी लगभग 4.8 प्रतिशत टूट चुके हैं, जो दिसंबर 2024 के बाद इसकी सबसे बड़ी वीकली गिरावट की ओर इशारा कर रहा है।


शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 6 बड़े कारण रहे-

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रहा। ईरान ने दो ऑयल टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं।

भारत जैसे देश के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें चिंता का विषय होती हैं क्योंकि इससे इंपोर्ट बिल बढ़ता है, चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव बनता है। इसका असर कंपनियों की कमाई और निवेशकों की धारणा दोनों पर पड़ता है।

2. कमजोर ग्लोबल संकेत

ग्लोबल बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले। एशियाई बाजारों में साउथ कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई 225, चीन का SSE कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। अमेरिकी बाजार भी पिछले सेशंस में दबाव में बंद हुए। डाउ जोन्स इंडेक्स 700 अंकों से अधिक गिरकर इस साल पहली बार 47,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स और नैस्डैक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटजिस्ट्स, वीके विजयकुमार के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता के कारण ग्लोबल बाजार दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के आसपास रहने से बाजार में तेजी की संभावना फिलहाल कमजोर दिख रही है।

3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को FIIs ने लगभग 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशकों ने 39,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली कर दी है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।

4. रुपये की कमजोरी

भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। शुक्रवार को रुपया 12 पैसे गिरकर 92.37 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। फॉरेक्स बाजार के जानकारों के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत डॉलर के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। कमजोर रुपया आयात लागत को बढ़ा देता है, जिससे महंगाई का जोखिम और बढ़ जाता है।

5. अमेरिकी फेड की नीति पर नजर

निवेशक अब फेडरल रिजर्व की अगली मॉनिटरी पॉलिसी बैठक का इंतजार कर रहे हैं, जो 17 मार्च को होने वाली है। निवेशकों की नजर खासतौर से फेड के नए आर्थिक अनुमान पर भी रहेगी, खासकर महंगाई (इन्फ्लेशन) के नए आकलन पर। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर भूराजनीतिक तनावों के चलते महंगाई बढ़ती है तो दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को लंबे समय तक मॉनिटरी पॉलिसी में सख्ती बनाए रखनी पड़ सकती है। इससे शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है और भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।

6. बैंकिंग और ऑटो शेयरों में बिकवाली

बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में आज तेज बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी बैंक करीब 1.75% गिरकर लगभग 54,000 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा था। इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव सरकारी बैंकों के शेयरों पर रहा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक और केनरा बैंक के शेयर करीब 2.3% से 2.7% तक गिर गए। बैंक निफ्टी में शामिल लगभग सभी बैंक शेयर उस समय नुकसान में ट्रेड कर रहे थे। प्राइवेट बैंकों में इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा और इसमें करीब 2.6% की गिरावट देखी गई।

वहीं ऑटो सेक्टर के शेयरों पर भी दबाव बना रहा। Nifty Auto (निफ्टी ऑटो) में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट देखी गई और शुक्रवार सुबह यह इंडेक्स 2% से ज्यादा नीचे आ गया। ऑटो सेक्टर पर बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, गैस की संभावित कमी और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों की चिंता का असर दिखाई दे रहा है, जिसकी वजह से इस सेक्टर के शेयरों में कमजोरी बनी हुई है।

चार्ट्स से क्या मिल रहे संकेत?

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट, आनंद जेम्स ने कहा कि आने वाले समय में निफ्टी पर थोड़ा दबाव बना रह सकता है। उन्होंने बताया कि निफ्टी ने 23,500 के स्तर से ऊपर जाने की कोशिश की, लेकिन गुरुवार को यह 23,820 के ऊपर टिक नहीं पाया। इसलिए अब निफ्टी के और नीचे जाने की संभावना दिख रही है और यह 23,090 के आसपास तक गिर सकता है। हालांकि बीच में 23,370 से 23,320 के बीच थोड़ा सपोर्ट मिल सकता है, जहां से कुछ समय के लिए गिरावट रुक सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर बाजार में उलटफेर की संभावना देखनी है तो निफ्टी को 23,460 के आसपास कंसॉलिडेट होना पड़ेगा। लेकिन असली तेजी की पुष्टि तब होगी जब निफ्टी 23,670 के ऊपर निकल जाएगा।

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