जापान ने लूटी आपके पोर्टफोलियो की इज्जत! Carry Trade के लालच ने दुनिया भर के शेयर बाजार को डुबाया

भारत में 4 जून की गिरावट के बाद अभी निवेशक संभले ही थे कि दुनिया भर के बाजार में आई गिरावट ने आपके पोर्टफोलियो को पक्के तौर पर लाल ही लाल कर दिया होगा। आखिर जापान की करेंसी ने कैसे पूरी दुनिया के बाजार को डूबा दिया। समझिए पूरा मामला

अपडेटेड Aug 05, 2024 पर 7:44 PM
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जापान की करेंसी Yen ने अमेरिकी सहित पूरी दुनिया के शेयर बाजार को धूल चटाई

अमेरिकी शेयर बाजार हो या दुनिया का कोई भी शेयर मार्केट, उन्हें एक झटके में चीन और जापान की करेंसी बर्बाद कर सकती है। इन पर सबसे ज्यादा असर Yen Exchange Rate का पड़ता है। येन, जापान की करेंसी है। फाइनेंशियल हिस्टोरियन रसेल नेपियर ने चेतावनी भी दी थी कि अगर कोई पूरी तरह यूएस डोमेस्टिक डायनेमिक्स पर फोकस करता है तो उसके लिए ये ट्रेंड खतरनाक हो सकता है। और हुआ भी कुछ ऐसा ही। इनवेस्टमेंट रिसर्च पोर्टल Eric के को-फाउंडर रसेल नेपियर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अगर जापान की मॉनेटरी पॉलिसी में कोई बदलाव होता है तो उसके असर से अमेरिका के फाइनेंशियल मार्केट्स को बचाना मुश्किल है। यानि देखा जाए तो अमेरिकी बाजार को जितना उसके जॉब्स के कमजोर डेटा ने बर्बाद नहीं किया उससे ज्यादा जापान की करेंसी Yen ने

तोड़ दिया है।

शेयर बाजार में अचानक आई गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है। ऐसा नहीं है कि बाजार में गिरावट की आशंका नहीं थी। गिरावट तो तय थी लेकिन इतने बड़े Slump का अनुमान किसी ने नहीं लगाया था। ग्लोबल मार्केट में मचे कोहराम से भारतीय शेयर बाजार भी कहां बच पाया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 2222.55 अंक यानि करीब 2.74 पर्सेंट गिरकर 78,759.40 के लेवल पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी 662.10 अंक यानि करीब 2.68 पर्सेंट गिरकर 24,055.60 पर बंद हुआ।

Share Market Crash: कैरी ट्रेड ने कहीं का नहीं छोड़ा


अमेरिकी मार्केट में गिरावट की असली वजह कैरी ट्रेड है। इसकी वजह से ही जापान के ट्रेडर्स ने अमेरिकी मार्केट में जमकर बिकवाली की और बाजार को हो गया। सबसे पहले जान लेते हैं कि ये कैरी ट्रेड होता क्या है जिसकी वजह से दुनिया भर के शेयर बाजार के होश उड़ चुके हैं। कैरी ट्रेड का सीधा मतलब है कि आप कहीं से सस्ता लोन उठाकर बाजार में इनवेस्ट करते हैं।

इसमें दो बातें सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं। पहली तो ये कि आप बड़े इनवेस्टर्स जिस देश से कर्ज ले रहा हो वहां इंटरेस्ट रेट बहुत कम हो। और साथ ही डॉलर के मुकाबले करेंसी बहुत कमजोर हो। ऐसे देश से पैसा उठाकर निवेशक उन देशों के मार्केट में निवेश करता है जहां इंटरेस्ट रेट ज्यादा होता है। अमूमन विकसित देशों के मुकाबले डेवलपिंग कंट्री में इंटरेस्ट रेट ज्यादा रहता है। यानि कैरी ट्रेड का पूरा फंडा ये है कि निवेशक कम इंटरेस्ट रेट पर कर्ज लेकर मार्केट में लगाता है और ज्यादा रिटर्न कमाता है।

Share Market Crash: कैरी ट्रेड का इतना इस्तेमाल क्यों होता है?

अब दूसरी सबसे जरूरी बात ये है कि कैरी ट्रेड में येन का इतना इस्तेमाल क्यों होता है। ये जानना अहम है क्योंकि इसी से आप समझ पाएंगे कि जापान की करेंसी ने अमेरिका सहित पूरी दुनिया के बाजार को कैसे तोड़ दिया है। दरअसल ट्रेडर्स कैरी ट्रेड के लिए सबसे ज्यादा कर्ज येन में लेते रहे हैं। येन में उतारचढ़ाव बहुत कम होता है जिसकी वजह से इसे कैरी ट्रेड के लिए सबसे सुटेबल करेंसी माना जाता रहा है। ट्रेंडर्स ये मान कर चल रहे थे कि जापान में इंटरेस्ट रेट निचले लेवल पर ही रहेगा।

लेकिन इस बार पूरा मामला पलट गया क्योंकि जापान के सेंट्रल बैंक- बैंक ऑफ जपान ने इंटरेस्ट रेट बढ़ा दिया। उसने आगे भी इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का संकेत दिया। फाइनेंशियल मार्केट हिस्टोरियन रसेल नेपियर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि निवेशकों ने अब ये देख भी लिया जापान में मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव का असर किस कदर अमेरिकी फाइनेंशियल मार्केट्स पर पड़ेगा।

Bank of Japan ने इंटरेस्ट रेट बढ़ाकर 0.25 फीसदी कर दिया। इससे पहले इंटरेस्ट रेट 0-0.1 फीसदी के बीच था। 2008 के बाद पहली बार येन का इंटरेस्ट रेट इस लेवल पर पहुंचा है। इसका सीधा असर येन में 'कैरी ट्रेड' पर पड़ा है। इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने से ट्रेडर्स ने कैरी ट्रेड के अपने सौदे काटने शुरू कर दिए। इसका सीधा असर ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स पर पड़ा।

Share Market Crash: क्यों निवेशक हुए पैनिक 

अगर आप पिछले कुछ हफ्तों के डेटा को देखेंगे तो ये समझ जाएंगे कि आखिर क्यों ट्रेडर्स पैनिक होकर अपना सौदा काट रहे हैं। आमतौर पर येन डॉलर के मुकाबले कमजोर रहता है लेकिन पिछले तीन हफ्तों में ही यह 10 फीसदी चढ़ चुका है। जापान की सरकार और बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में इकोनॉमी और करेंसी से जुड़े कई कदम उठाए हैं। इससे बीते तीन हफ्तों में जापान की करेंसी येन (Yen) की कीमत डॉलर के मुकाबले करीब 10 फीसदी बढ़ी है। पिछले हफ्ते जापान की सरकार ने येन को सहारा देने के लिए 36.8 अरब डॉलर खर्च करने की पुष्टि की। दरअसल, येन की कीमत डॉलर के मुकाबले गिरकर 38 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इसलिए जापान के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ जापान को येन को और गिरने से बचाने के कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।

फाइनेंशियल हिस्टोरियन नेपियर के मुताबिक, येन के रेट्स में बदलाव का असर अमेरिकी में शेयर प्राइस पर दिखा है। इससे यह संकेत मिलता है कि आगे अमेरिका और दूसरे डेवलप्ड देशों के एसेट प्राइस पर जापान की मॉनेटरी पॉलिसी का असर और भयावह दिख सकता है। नेपियर ने बताया कि हाल ही में येन की वैल्यू और इंटरेस्ट रेट बढ़ने से ट्रेडर्स पर येन में लिए लोन चुकाने का प्रेशर बढ़ गया। लिहाजा उन्होंने अमेरिकी शेयर बाजार में जमकर बिकवाली शुरू कर दी जिससे अमेरिका सहित समूचे ग्लोबल मार्केट में कोहराम मच गया।

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