Share Market Crash: शेयर बाजार में इन 5 कारणों से भूचाल; सेंसेक्स 1,700 अंक टूटा, निफ्टी 22,400 के नीचे

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 30 मार्च को लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,700 अंकों से भी अधिक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 22,350 के भी नीचे चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज होने की आशंका से निवेशकों को बेचैन कर दिया है

अपडेटेड Mar 30, 2026 पर 3:45 PM
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Stock Market Live Update:एक अप्रैल से ट्रेडिंग महंगी होगी। ऑप्शंस में 50% तो फ्यूचर्स में 150% ज्यादा STT देनी होगी।

Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजारों में आज 30 मार्च को लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,700 अंकों से भी अधिक टूट गया। वहीं निफ्टी गिरकर 22,400 के भी नीचे चला गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मिडिल ईस्ट में युद्ध तेज होने की आशंका से निवेशक जोखिम लेने से बचते दिख रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली ने भी बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर बनाए रखा है।

मार्च महीने में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी करीब 10.5% तक गिर चुके चुके हैं। इसके साथ ही अब यह मार्च 2020 में कोविड-19 के कारण आई गिरावट के बाद दूसरा सबसे खराब महीना हो सकता है।

आज कारोबार के दौरान सबसे अधिक गिरावट बैकिंग, फाइनेंशियल, टेलीकॉम और रियल्टी शेयरों में देखने को मिली। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स भी कारोबार के दौरान 2 प्रतिशत तक टूट गए। मेटल और ऑयल एंड गैस को छोड़कर बाकी सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।


कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1635.67 अंक यानी 2.22% गिरकर 71,947.55 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 488.20 अंक यानी 2.14% गिरकर 22,422.85 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

शेयर बाजार में आज की इस गिरावट के पीछे 5 बड़े कारण रहे-

1. क्रूड के दाम में लगातार उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 3% बढ़कर 115.98 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस महीने अब तक क्रूड के दाम करीब 60% तक बढ़ चुके है। यह 1990 में इराक के कुवैत पर आक्रमण के बाद आई तेजी से भी अधिक है। अमेरिकी क्रूड की कीमत भी सोमवार 3% बढ़कर 102.52 डॉलर प्रति बैरल हो गई और इसकी मंथली बढ़त 53% हो गई है।

2. पांचवे हफ्ते में ईरान वार

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा जंग अपने पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और अब मिडिल ईस्ट के और इलाकों तक फैल गया है। यमन के ईरान समर्थित हूती समूह ने इस वीकेंड इजराइल पर हमले शुरू कर दिए, जिससे अब अरब प्रायद्वीप और लाल सागर के जरिए गुजरने वाली ऑयल सप्लाई में भी रुकावट आने का डर बढ़ गया है।

इस बीच, पाकिस्तान ने रविवार को कहा कि वह आने वाले दिनों में लड़ाई खत्म करने के लिए "बातचीत" करने की तैयारी कर रहा है। वहीं ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जमीनी कार्रवाई के लिए सेना भेजता है तो वह उसका जवाब देने के लिए तैयार है।

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार ने कहा, “मिडिल ईस्ट में युद्ध खत्म होने की जगह बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। यमन का हूती समूह भी संघर्ष में शामिल हो गया है और अमेरिका ने भी हमले को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम फिर से 116 डॉलर तक पहुंच गया है। इसका असर भारत पर भी दिख रहा है। पहले जहां जीडीपी में तेज ग्रोथ, कम महंगाई दर, मीडियम चालू खाता घाटा और FY27 में कॉर्पोरेट अर्निंग में ग्रोथ की उम्मीद थी। वहीं अब हमें FY27 के लिए कम GDP ग्रोथ, अधिक महंगाई दर, ऊंचे चालू खाता घाटा और कम अर्निंग ग्रोथ की संभावना का सामना करना पड़ रहा है।”

3. बैंकिंग शेयरों में गिरावट

बैकिंग और फाइनेंशियल शेयरों में आज सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक निर्देश के बाद आई, जिसमें उसने ऑनशोर एक्सपोजर पर पोजिशन लिमिट कड़ी कर दी है। बैंकर्स का कहना है कि इस कदम से पोजिशन अचानक और अव्यवस्थित तरीके से खुल सकते हैं और जिससे नुकसान होने की संभावना बढ़ जाती है।

RBI ने शुक्रवार देर रात निर्देश दिया कि फॉरेक्स मार्केट में बैंकों की नेट ओपन रुपये पोजिशन को हर व्यापारिक दिन के अंत तक 1 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) तक सीमित किया जाए। इसका पालन सभी बैंकों को 10 अप्रैल तक करना अनिवार्य है।

RBI के ऑनशोर पोजिशन लिमिट पर रोक लगाने से उम्मीद है कि बैंक अब मौजूदा आर्बिट्रेज पोजिशन खत्म होने के चलते घरेलू फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में डॉलर बेचेंगे। ये आर्बिट्राज ट्रेड इसलिए बनाए गए थे ताकि ऑनशोर डॉलर खरीदकर और NDF मार्केट में बेचकर दोनों सेगमेंट के बीच के स्प्रेड का फायदा उठाया जा सके। ऐसी पोजिशन का साइज 25 अरब डॉलर से 50 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

4. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी शेयर बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण है। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों से 4,367 करोड़ रुपये की बिकवाली की। इसके साथ ही अब वे किसी एक महीने में सबसे अधिक निकासी का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं।

वीके विजयकुमार ने बताया, "मार्च में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने हर ट्रेडिंग दिन शुद्ध रूप से बिकवाली की है। 27 मार्च तक के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक इस महीने अब तक करीब 1,18,093 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जो एक नया रिकॉर्ड है।"

उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद ग्लोबल शेयर बाजारों में गिरावट, रुपये में लगातार कमजोरी, खाड़ी देशोंर से रेमिटेंस में कमी का डर और कच्चे तेल की ऊंची कीमत का भारत की इकोनॉमी पर संभावित असर जैसे कारणों ने FPIs की लगातार बिकवाली में योगदान दिया है।

5. निफ्टी की मंथली F&O एक्सपायरी

मंगलवार को शेयर बाजार में छुट्टी के चलते निफ्टी के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स की आज सोमवार को मंथली एक्सपायरी रही। इसके चलते भी बाजार में काफी उतार-चढ़ाव दिखा। शेयर बाजार के निवेशकों में मौजूद घबराहट को दिखाने वाला, इंडिया वोलेटैलिटी इंडेक्स भी सोमवार 8% से अधिक बढ़कर 28.78 पर पहुंच गया

चार्ट्स से क्या मिल रहे संकेत?

चॉइस ब्रोकिंग के रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर ने बताया, "हालिया तेज गिरावट और ग्लोबल बाजारों से मिलजुले संकेतों के चलते निवेशकों को अनुशासित और चुनी हुई रणनीति अपनाने की सलाह दी जाती है। किसी भी शॉर्ट-टर्म उछाल के पीछे भागने के बजाय फंडामेंटल तौर पर मजबूत शेयरों को गिरावट के समय खरीदने पर ध्यान देना समझदारी होगी।"

उन्होंने कहा कि नई लंबी पोजिशन तभी लेने पर विचार करना चाहिए जब निफ्टी स्पष्ट रूप से 24,000 के स्तर को पार करे और वहां टिके। ऐसा होने से मार्केट सेंटीमेंट के बेहतर होने का संकेत मिलेगा, जो अधिक स्थिर और टिकाऊ रिकवरी की राह खोल सकता है।

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