2024 में इन शेयरों से रहें दूर, आ सकती है गिरावट, जानें स्टॉक मार्केट के लिए 5 बड़े खतरे
Stock Market outlook: शेयर बाजार के लिए 2023 शानदार साल रहा। सेंसेक्स और निफ्टी ने इस दौरान करीब 20 पर्सेंट का रिटर्न दिया। हालांकि बाजार के लिए नए साल 2024 की शुरुआत कमजोर रही और पहले हफ्ते में अस्थिरता बढ़ी है। वोलैटिलिटी इंडेक्स VIX बीते 1 जनवरी को बढ़कर 14.5 पर पहुंच गया था, जो उच्च स्तर की अस्थिरता का संकेत देता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि उच्च VIX स्तरों पर बड़ी बिकवाली का दौर आ सकता है
एनालिस्ट्स का मानना है कि सेक्टर और कैटेगरी के हिसाब से 2024 उलटफेर का साल होगा
Stock Market outlook: शेयर बाजार के लिए 2023 शानदार साल रहा। सेंसेक्स और निफ्टी ने इस दौरान करीब 20 पर्सेंट का रिटर्न दिया। हालांकि बाजार के लिए नए साल 2024 की शुरुआत कमजोर रही और पहले हफ्ते में अस्थिरता बढ़ी है। वोलैटिलिटी इंडेक्स VIX बीते 1 जनवरी को बढ़कर 14.5 पर पहुंच गया था, जो उच्च स्तर की अस्थिरता का संकेत देता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि उच्च VIX स्तरों पर बड़ी बिकवाली का दौर आ सकता है। हालांकि, जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड, विनोद नायर का कहना है लंबी अवधि में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी रहने का अनुमान है। इसके पीछे उन्होंने मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ और राजनीतिक स्थिरता को वजह बताया।
मनीकंट्रोल ने कई मार्केट एक्सपर्ट्स से उन प्रमुख जोखिमों के बारे में बात की, जिन पर निवेशकों को 2024 में नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चुनाव पूर्व रैली से बाजार के काफी ऊपर जाने और अल-नीनो के कारण फूड इंफ्लेशन बढ़ने जैसे कारणों शेयर बाजार पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों को कुछ कंसॉलिडेशन के लिए भी तैयार रहना चाहिए। Angel One में टेक्निकल और डेरिवेटिव के सीनियर एनालिस्ट, ओशो कृष्ण ने कहा, "हम इस समय प्राइस-आधार वाले करेक्शन के दौर में है, जहां हालिया रैली के बाद कई स्टॉक में एडजस्मेंट देखने को मिल सकता है। इसीलिए यहां पर वन-स्टेप अप्रोज के साथ व्यावहारिक नजरिया रखने की सलाह दी जाती है।"
वहीं नायर ने कहा, “हमें साल 2024 में दोनों प्रमुख इंडेक्स से 10-12 प्रतिशत के मामूली रिटर्न की उम्मीद है। यहां निवेश को डायवर्सिफाई कर मल्टी-एसेट्स में निवेश करने की सलाह दी जाती है।”
जियोजित फाइनेंशियल का मानना है कि सेक्टर और कैटेगरी के हिसाब से 2024 उलटफेर का साल होगा। नायर ने कहा “हमें मिड और स्मॉल कैप की तुलना में लार्ज कैप अधिक पसंद हैं। मोटे तौर पर इस साल में कुछ खास स्टॉक और सेक्टर में तेजी देखने को मिल सकती है। हमें बैंक, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, केमिकल्स और आईटी सेक्टर्स पसंद हैं।''
एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को कमजोर फंडामेंटल्स वाले शेयरों से दूर रहना चाहिए। जब बाजार अस्थिर हो जाता है तो मजबूत फंडामेंटल्स वाले शेयरों की तुलना में इनमें अधिक गिरावट आती है।
SAS Online के श्रेय जैन ने कहा, “निवेशकों को उन लार्ज और मिडपैक स्टॉक्स को पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए, जिनके पास प्राइसिंग पावर और मजबूत बैलेंस शीट हो। फंडामेंटल रूप से इन मजबूत शेयरों से निवेशकों को किसी भी चुनौती से निपटने में मदद मिल सकती है। ट्रेडर्स को स्टॉप लॉस पर बने रहने की जरूरत है।"
एनालिस्ट्स के बताए 5 जोखिम, जो 2024 में निवेशकों के रिटर्न को नुकसान पहुंचा सकते हैं:-
1. प्रीमियम वैल्यूएशन: भारतीय बाजार फिलहाल अपने एक साल के फॉरवर्ड पी/ई के 20 गुना पर कारोबार कर रहे हैं। यह इसके लंबी अवधि के औसत से ऊपर है। नायर ने मनीकंट्रोल को बताया कि मौजूदा रैली से वैल्यूएशन ऊंचा हो गया है, और यह चुनाव पूर्व रैली को प्रभावित कर सकता है।
2. ऊंची महंगाई और ब्याज दरों में कटौती: अगर अलनीनो के असर से देश में इस साल फूड इंफ्लेशन बढ़ा, तो यह बाजार के लिए भी चुनौती हो सकता है। भारत में महंगाई के लंबी अवधि के औसत से ऊपर बने रहने की उम्मीद है, जो ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना को सीमित करता है।
3. भू-राजनीतिक जोखिम: रूस-यूक्रेन, इजराइल-हमास युद्ध और लाल सागर में जहाजों पर हाल के हमलों से माल ढुलाई लागत, सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां और क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हो सकता हैं।
4. बॉन्ड यील्ड: दिसंबर तिमाही के दौरान बॉन्ड यील्ड में भारी गिरावट आई थी। हालांकि अब इसमें एक बार फिर से तेजी शुरू हो गई, जो शॉर्ट से मध्यम अवधि में जारी रह सकती है। नायर ने मनीकंट्रोल को बताया, "इसलिए, बाजार को 2024 में रिवर्स सप्लाई का सामना करना पड़ सकता है, जिसका भारत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"
5. मंदी, अनिश्चितता: करेंसी में उतार-चढ़ाव, अहम पॉलिसी में बदलाव, ग्लोबल राजनीतिक अनिश्चितताएं और आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में बाजार के लिए अहम जोखिम पैदा कर सकते हैं। मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड की डायरेक्टर, पलक अरोड़ा चोपड़ा ने बताया, "विकसित देशों की इकोनॉमी में मंदी भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा कमोडिटी की अस्थिर कीमतें, विशेष रूप से क्रूड की कीमतें, बाजार के सेंटीमट को कमजोर कर सकती हैं।"