एक दिन की गिरावट झेलने के बाद शेयर बाजार में 29 अप्रैल को तेजी लौटी। दिन के बीच में यह शानदार रही लेकिन फिर बाजार थोड़ा नीचे आया। सुबह सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में खुले। इसके बाद सेंसेक्स ने पिछली क्लोजिंग से 1095.6 अंकों की तेजी देखी और 77,982.51 के हाई तक चला गया। इसी तरह निफ्टी भी पिछली क्लोजिंग से लगभग 336.1 अंक उछलकर 24,331.80 के हाई तक गया।
हालांकि अब यह थोड़ा नीचे आया है। ब्रेंट क्रूड में फिर से उछाल की वजह से बाजार में तेजी की रफ्तार धीमी पड़ी। ब्रेंट क्रूड उछलकर 115 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। एक वजह यह भी रही कि मार्केट में अच्छी तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग होने लगी। कारोबार बंद होने पर सेंसेक्स 609.45 अंकों की बढ़त के साथ 77,496.36 पर और निफ्टी 181.95 अंकों की बढ़त के साथ 24,177.65 पर सेटल हुआ।
एक दिन पहले यानि कि 28 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त उठापटक देखने को मिली थी। बाजार लाल निशान में खुले थे, फिर बीच में हरे निशान में आए और फिर गिरावट में बंद हुए। बुधवार की तेजी के पीछे अहम वजह क्या हैं, जानिए...
शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की। ऑटो, रियल्टी, IT और FMCG जैसे कुछ प्रमुख सेक्टर्स में वैल्यू बाइंग देखने को मिली। एक दिन पहले सेंसेक्स 416.72 अंकों की गिरावट के साथ 76,886.91 पर और निफ्टी 97 अंकों की गिरावट के साथ 23,995.70 पर बंद हुआ था।
दूसरे एशियाई बाजारों में आई बढ़त की वजह से भी भारतीय बाजार गुलजार हैं। हेंग सेंग, कॉस्पी, सेट कंपोजिट, शंघाई कंपोजिट, जकार्ता कंपोजिट हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं। वहीं निक्केई 225, ताइवान वेटेड में गिरावट है। मंगलवार को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट में बंद हुए थे।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी
यह भी माना जा रहा है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से गिरावट रोकने में मदद मिली। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) मंगलवार को सेलर रहे। उन्होंने 2,103.74 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,712.01 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। लिहाजा कीमत में कमी, इंपोर्ट बिल कम करती है। लेकिन बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव बढ़ता है, व्यापार घाटा बढ़ने का डर पैदा हो जाता है और कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट भी बढ़ जाती है, खासकर ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर्स में।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।