Share Markets: सेंसेक्स दिन के हाई से 800 अंक टूटा, इन 3 कारणों से फिसला शेयर बाजार
Share Markets: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार 20 मार्च को ऊंचे स्तरों से अचानक कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के हाई से 800 अंकों से ज्यादा फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लुढ़ककर 23,100 के स्तर के पास आ गया। रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है
Share Markets: क्रूड ऑयल का दाम 100 डॉलर के ऊपर रहना भी निवेशकों को परेशान कर रहा है
Share Markets: भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार 20 मार्च को ऊंचे स्तरों से अचानक कमजोरी देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के हाई से 800 अंकों से ज्यादा फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लुढ़ककर 23,100 के स्तर के पास आ गया। रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है। इसके अलावा क्रूड ऑयल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर रहना भी निवेशकों को परेशान कर रहा है।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 1,050 तक उछल गया, लेकिन बाद में इसके कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। दोपहर 2:50 बजे के करीब, सेंसेक्स 249.83 अंक यानी 0.34% की बढ़त के साथ 74,457.07 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 84.40 अंक चढ़कर 23,086.55 पर बना हुआ था।
शेयर बाजार में आज की रफ्तार थमने के पीछे 3 बड़े कारण रहे-
1. कमजोर रुपये ने बिगाड़ा माहौल
शेयर बाजार में ऊंचे स्तर से गिरावट की सबसे बड़ी वजह रुपये की कमजोरी रही। भारतीय रुपया आज कारोबार के दौरान 93.24 के नए रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण एनर्जी की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे भारत की महंगाई और आर्थिक संतुलन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
नोमुरा की अर्थशास्त्री सोनल वर्मा के मुताबिक, कच्चे तेल में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से महंगाई में 0.5% तक का इजाफा हो सकता है। उन्होंने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान अब 4.5% तक बढ़ा दिया है।
2. कच्चा तेल अब भी $100 के ऊपर
अंतराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के भाव में शुक्रवार को कुछ नरमी आई, लेकिन यह अभी भी 100 डॉलर के पार बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड का भाव इस समय घटकर करीब 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। भारत जैसे क्रूड के आयात पर निर्भर देशों के लिए इसका ऊंचा दाम नेगेटेवि माना जाता है। इससे महंगाई के मोर्चे पर दबाव पैदा होता है और कंपनियों की लागत में भी इजाफा होता है, जिससे बाजार पर दबाव पड़ता है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। एक दिन पहले 19 मार्च को विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से करीब ₹7,558 करोड़ के शेयर बेचे। मार्च महीने में अब तक विदेशी निवेशक, भारतीय शेयर बाजार से करीब 81,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। इससे बाजार में डर और सतर्कता का माहौल दिखा।
हालांकि, दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने गुरुवार को ₹3,864 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक संभाला, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का रुख अभी भी सतर्क बना हुआ है।
टेक्निकल एनालिस्ट्स का क्या है कहना?
एनालिस्ट्स का कहना है कि शेयर जार में आगे भी अस्थिरता बनी रह सकती है। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रैटजिस्ट्स, आनंद जेम्स के मुताबिक, अगर निफ्टी 23,190 के ऊपर टिक नहीं पाता या 22,930 के नीचे फिसलता है, तो अगला बड़ा गिरावट का स्तर 22,000 तक जा सकता है। वहीं, अगर बाजार संभलता है तो 23,435 के आसपास रिकवरी देखने को मिल सकती है।
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