अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद शेयर बाजार में मार्च में बड़ी गिरावट आई। अप्रैल में मार्केट में रिकवरी दिखी। इसके बावजूद निफ्टी 50 सितंबर 2024 की अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 8 फीसदी नीचे है। बीते डेढ़ साल में रूस-यूक्रेन की लड़ाई, कंपनियों की कमजोर अर्निंग्स ग्रोथ और अमेरिकी टैरिफ सहित कई चीजों का शेयर बाजार पर निगेटिव असर पड़ा। लेकिन, पिछले कुछ समय से भारतीय शेयर बाजार और कई दूसरों बाजारों की चाल में बड़ा फर्क दिखा है।
दुनिया के कई बाजारों में 30-150 फीसदी तेजी
अप्रैल में दुनिया के कई बाजार अपने ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए या उनमें तेज रिकवरी दिखी। कुछ देशों के शेयर बाजारों में मध्यपूर्व की लड़ाई से पहले के लेवल के मुकाबले 30-150 फीसदी तक तेजी आई। लेकिन, भारतीय शेयर बाजार ज्यादातर समय लड़ाई के पहले के अपने स्तर से नीचे बना रहा। यह चौंकाने वाली बात है। आम तौर पर भारतीय बाजारों का प्रदर्शन दुनिया के दूसरे बाजारों खासकर उभरते बाजारों के मुकाबले बेहतर रहता है।
मार्केट में तेजी के लिए स्ट्रॉन्ग अर्निंग्स ग्रोथ जरूरी
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों की वैल्यूएशंस को देखते हुए अर्निंग्स ग्रोथ का बढ़ना बहुत जरूरी है। दुनिया के दूसरे बाजारों में अर्निंग्स प्रति शेयर (EPS) की ग्रोथ 20-40 फीसदी के बीच है। इंडिया में ईपीएस ग्रोथ 18 फीसदी है। अगले एक साल में इंडिया की फॉरवर्ड अर्निंग्स ग्रोथ का अनुमान 18 फीसदी है, जबकि अमेरिका का 23 फीसदी, चीन का 29 फीसदी और उभरते देशों (MSCI EM Index) का 51 फीसदी है।
ज्यादा वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी फंड कर रहे बिकवाली
भारतीय शेयरों की ज्यादा वैल्यूएशंस की वजह से विदेशी फंड्स लगातार यहां बिकवाली कर रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय बाजारों में बड़ी तेजी तभी आएगी जब कंपनियों की अर्निंग्स में लगातार अच्छी तेजी आएगी। अभी इंडियन मार्केट्स की वैल्यूएशन 19.5 गुना (PE Ratio) है, ज्यादातर उभरते बाजारों के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडियन मार्केट्स के कमजोर प्रदर्शन के पीछ कुछ और वजहें भी हैं। इनमें AI कंपनियों की गैर-मौजूदगी भी शामिल है।
भारत में AI कंपनियों की गैर-मौजूदगी का भी असर
अमेरिका सहित दुनिया के कई बाजारों में पिछले कुछ महीनों में आई तूफानी तेजी में एआई कंपनियों के शेयरों में उछाल का बड़ा हाथ है। भारत इस मामले में लगातार पिछड़ रहा है। भारतीय बाजार में तेजी तभी आएगी, जब विदेशी फंडों की वापसी होगी। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भारतीय बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय बाजार को ज्यादा गिरने नहीं दिया है। लेकिन, बाजार में तेजी के लिए विदेशी फंडों का निवेश जरूरी है। ऐसा तभी होगा जब कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ बढ़ेगी।