पिछले 18 महीनों में बाजार में जिस तरह की तेजी आई है, उसका श्रेय रिटेल इनवेस्टर्स और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) को जाता है। पिछले कुछ समय की बात करें तो क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों ने बाजार को सपोर्ट दिया है। इस बार ऑयल की कीमतों में गिरावट की वजह कमजोर डिमांड नहीं है बल्कि ज्यादा सप्लाई है। नॉन-ओपेक ऑयल उत्पादक ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं, जिससे बड़े उत्पादकों की बाजार हिस्सेदारी घटी है। साथ ही मार्केट में कम भाव पर क्रूड मिल रहा है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे क्रूड की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है, क्योंकि एआई सेक्टर का विस्तार होगा, जिसके लिए ईंधन की जरूरत पड़ेगी।
