हाउसिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में गतिविधियां सुस्त पड़ने के संकेत हैं। देश के सबसे बड़े 9 शहरों में इस साल जुलाई-सितंबर के दौरान रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग में 11 फीसदी गिरावट आई है, जबकि बिक्री (सेल्स) 18 फीसदी घटी है। प्रॉपइक्विटी के डेटा से यह जानकारी मिली है। एक बड़े कंस्ट्रक्शन मार्केट उत्तर प्रदेश में भी काफी सुस्ती आई है। कंस्ट्रक्शन एक्टिविटिजी में सुस्ती का सीधा असर सीमेंट की डिमांड पर पड़ा है। डिमांड में कमी ऐसे वक्त आई है, जब सीमेंट कंपनियां पहले से मुश्किल का सामना कर रही हैं। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी हिस्सों में सीमेंट कंपनियों ने उत्पादन में 10-15 फीसदी की कमी की है।
सीमेंट कंपनियां (Cement Companies) सेल्स बढ़ाने के लिए ट्रेड डिस्काउंट ऑफर कर रही हैं। रॉ मैटेरियल की बढ़ती कीमतों के चलते मार्जिन घटा है। इससे FY25 की पहली छमाही में सीमेंट कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहने के आसार हैं। सीमेंट कंपनियों ने अगले वित्त वर्ष में उत्पादन क्षमता 35-40 मिलियन टन बढ़ाने का प्लान बनाया था। लेकिन, मार्केट की मौजूदा स्थिति में यह मुश्किल लगता है। उधर, सीमेंट कंपनियों की बढ़ती वैल्यूएशन चिंता पैदा करती है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने सीमेंट कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 100 अरब डॉलर हो जाने का अनुमान व्यक्त किया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वैल्यूएशन को तब वाजिब माना जाएगा जब अगले 30 साल में सीमेंट कंपनियों की सेल्स 40-60 अरब टन होगी। यह नामुमकिन लगता है।
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पिरामल फार्मा के शेयर 25 सितंबर को 4.5 फीसदी चढ़कर 226.4 रुपये पर बंद हुए। इसकी वजह यह है कि हाल में एक एनालिस्ट मीटिंग में Piramal Pharma ने बिजनेस की ग्रोथ को लेकर बड़ा प्लान पेश किया है। उसने साल 2030 तक 2 अरब डॉलर रेवेन्यू का टारगेट तय किया है। बुल्स का कहना है कि अमेरिका में बायोसेक्योर एक्ट लागू होने से पिरामल फार्मा की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। कंपनी ने FY30 तक नेट डेट और एबिड्टा रेशियो को FY24 के 3 गुना से घटाकर 1 गुना तक लाने का प्लान बनाया है। कंपनी ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक ग्रोथ पर फोकस बढ़ाएगी। इससे कंपनी को रिटर्न रेशियो बढ़ाने और प्रॉफिट का टारगेट हासिल करने में मदद मिलेगी। उधर, बेयर्स की दलील है कि कॉम्पलेक्स हॉस्पिटल जेनरिक्स (CHS) सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ रही है। यह स्टॉक अप्रैल से सितंबर के बीच पहले ही 76 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है। इस वजह से इसमें मुनाफावसूली हो सकती है।