मशहूर लेखक Fred Schewd Jr ने कहा था कि लोगों को यह समझ में आएगा कि बेवकूफों की सलाह पर अमल कर वे न सिर्फ बेवकूफ बने हैं बल्कि वे लुट चुके हैं। क्या शुक्रवार को हुए ट्रेड के पीछे फाइनेंशियल ईयर के आखिर में अच्छी NAV दिखाने की म्यूचुअल फंडों की कोशिश का हाथ था? या यह इस बात का संकेत है कि बुल्स (Bulls) ने अपना आत्मविश्वास फिर से हासिल कर लिया है? हर पांच शेयरों में तेजी के मुकाबले सिर्फ दो शेयरों में गिरावट दिखी। इससे पता चलता है कि बुल्स का आत्मविश्वास लौट आया है। लेकिन, अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि बैंकिंग क्राइसिस (Banking Crisis) और बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स को लेकर चिंता अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है।
डिफेंस शेयरों की चमक लौटी
डिफेंस शेयरों की चमक लौट आई है। इसके पीछे बीते हफ्ते सरकार के एक के बाद एक कई फैसलों का हाथ है। अभी डिफेंस सेक्टर की स्टोरी दमदार दिख रही है। कई कंपनियों की अगली दो से तीन साल की कमाई को लेकर तस्वीर साफ है। इसकी वजह उनकी मजबूत ऑर्डर बुक्स हैं।
इनवेस्टर्स ने पिछले कुछ महीनों में डिफेंस शेयरों में दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। इसकी वजह यह है कि तीसरी तिमाही में सरकार से ऑर्डर मिलने की रफ्तार मार्केट के अनुमान से कम रही है। अब जब ऑर्डर को लेकर चिंता दूर हो गई है, तब यह देखना बाकी है कि इसका कितना असर इन शेयरों पर पड़ चुका है। डिफेंस शेयरों की स्टोरी से जुड़ा दूसरा अहम पहलू यह है कि ऐसे ज्यादातर शेयर इंस्टीट्यूशंस के पास हैं। यह भी समझना होगा कि ऑर्डर बुक्स तो बहुत अच्छी हैं लेकिन प्रोजेक्ट को किस तरह पूरा किया जाता है यह बहुत मायने रखता है। खासकर तब जब सप्लाई से जुड़ी मुश्किलें अब भी मौजूद हैं।
कोरोना के मामले फिर से आने शुरू हो गए हैं। लेकिन, निवेशक डायग्नॉस्टिक्स शेयरों को खरीदने में किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, इनवेस्टर्स यह समझने लगे हैं कि कोविड की जांच से हुई धमाकेदार कमाई अब बीते दिनों की बात हो चुकी है। उनके मार्जिन के 2020-21 के स्तर के करीब पहुंचने की कोई उम्मीद नहीं दिखती, जब कोरोना का महामारी चरम पर थी।
रिटेल इनवेस्टर्स की बेरुखी
उधर, अमेरिका में शेयरों में रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी घटती दिख रही है। शेयरों की खरीदारी 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने कहा है कि इससे मार्केट को जरूरी सपोर्ट नहीं मिल रहा है। उसने अपनी खबर में बताया है, "रिटेल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी शेयरों में घटने के साथ ही प्रोफेशनल मनी मैनेजर्स भी अमेरिकी कंपनियों के शेयरों से दूरी बनाते दिख रहे हैं। ऐसे में कंपनियां अपने शेयरों को बायबैक कर रही हैं, जिससे बाजार को सपोर्ट मिल रहा है।"
ब्रोकिंग और डीमैट अकाउंट्स खुलने की रफ्तार
इधर, इंडिया में भी कुछ ऐसी ही स्थिति दिख रही है। ब्रोकिंग अकाउंट्स और डीमैट अकाउंट्स खुलने की रफ्तार घटी है। म्यूचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीमों में निवेश में भी कमी आई है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनवेस्टर्स की अच्छी खरीदारी से बाजार को सपोर्ट मिलता दिख रहा था, क्योंकि विदेशी निवेशक लगातार मार्केट में बिकवाली कर रहे थे।