ज्यादातर कंपनियों के जून तिमाही के रिजल्ट्स आ गए हैं। रिटेल इनफ्लेशन का डेटा जारी हो चुका है। अब स्टॉक मार्केट की आगे की दिशा आने वाली नई खबरों और डेटा पर निर्भर करेगी। घरेलू संस्थागत निवेशकों का सपोर्ट मार्केट को मिल रहा है। 2 अगस्त से ही वे शुद्ध रूप से खरीदारी कर रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। इस महीने बीच-बीच में उन्होंने खरीदारी की है। अब नजरें अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की स्पीच पर लगी हैं। वे इस हफ्ते के अंत में जैक्सन होल सिंपोजियम में स्पीच देंगे। आम तौर पर चेयरमैन की स्पीच से केंद्रीय बैंक की पॉलिसी का संकेत मिलता है।
इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी की उम्मीद
पॉवेल (Jerome Powell) यह संकेत दे सकते हैं कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में वह इंटरेस्ट रेट (Interest Rate) में कमी करेंगे या नहीं। अगर वह इंटरेस्ट रेट में कमी करेंगे तो यह कमी कितनी होगी-25 बेसिस प्वाइंट्स या 50 बेसिस प्वाइंट्स? सवाल है कि अमेरिकी केंद्र बैंक को इंटरेस्ट रेट घटाने का फैसला लेने में इतनी मुश्किल क्यों आ रही है? इसकी वजह अमेरिका में मंदी का डर है। हाल में आए आकंड़े बताते हैं कि अमेरिकी इकोनॉमी में एक्टिविटी सुस्त पड़ रही है, लेकिन यह बहुत कमजोर नहीं है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों पर नजर
मॉर्गन स्टेनली के चीफ ग्लोबल इकोनॉमिस्ट सेठ बी कारपेंटर का कहना है कि पॉवेल स्पीच में यह बता सकते हैं कि तेज रफ्तार के बाद क्यों इकोनॉमी में सुस्ती आई है और क्यों यह मंदी में जाने से बचा रहेगा। उनका मानना है कि पॉवेल इंटरेस्ट रेट में लगातार 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी कर सकते हैं। चूंकि मार्केट अमेरिका में इंटरेस्ट रेट घटने के अनुमान पर पहले ही खुशियां मना चुका है तो क्या पॉवेल के इंटरेस्ट रेट घटाने के संकेत देने पर विदेशी संस्थागत निवेशक इंडियन मार्केट में फिर से खरीदारी शुरू करेंगे? या ज्यादा वैल्यूएशन की वजह से वे इंडियन मार्केट से दूरी बनाए रहेंगे?
एनएचपीसी के शेयर 21 अगस्त को 0.8 फीसदी की कमजोरी के साथ 95 रुपये पर बंद हुए। लैंडस्लाइड का असर तीस्ता नदी पर कंपनी के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर पड़ा है। बुल्स का कहना है कि NHPC के 10.7 गीगावॉट प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इसके अलावा 8.3 गीगावॉट के प्रोजेक्ट्स डेवलपमेंट के अलग-अलग चरण में हैं। इन प्रोजेक्ट्स के बन जाने और उत्पादन शुरू हो जाने के बाद कंपनी के शेयरों रिरेटिंग हो सकती है। चूंकि एनएचपीसी का प्रोडक्शन क्लीन एनर्जी के तहत आता है, जिससे रिन्यूएबल एनर्जी पर सरकार के बढ़ते फोकस का फायदा कंपनी को मिलेगा। उधर, बुल्स की दलील है कि प्लांट पूरे होने में देर होने पर शेयरों की रेटिंग में कमी देखने को मिल सकती है। फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का असर कंपनी के कामकाज पर पड़ सकता है।
एलएंडटी का शेयर 21 अगस्त को 0.6 फीसदी के उछाल के साथ 3,593.75 रुपये पर बंद हुआ। बुल्स का कहना है कि अभी स्टॉक में FY25/26 की अनुमानित अर्निंग्स के 30.8/23.6 गुना पीई पर ट्रेडिंग हो रही है, जिससे यह इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के शेयरों की तुलना में अट्रैक्टिव दिखता है। नए ऑर्डर्स, मार्जिन में इजाफा और अच्छी सेल्स ग्रोथ से आने वाली तिमाहियों में L&T की अर्निंग्स बढ़ने की संभावना है। बेयर्स की दलील है कि प्राइवेट कैपिटल एक्सपेंडिचर अभी उस लेवल पर नहीं पहुंचा है, जितनी उम्मीद थी। प्रोजेक्ट में देरी का असर भी कंपनी के रेवेन्यू पर पड़ सकता है। कंपनी को लगातार लेबर की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है।
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टेक महिंद्रा का शेयर 21 अगस्त को 1.3 फीसदी गिरकर 1,608 रुपये पर बंद हुआ। सीएलएसए ने Tech Mahindra के शेयरों की रेटिंग घटाई है। इसकी रेटिंग 'आउटपरफॉर्म' से घटाकर 'होल्ड' कर दी है। उसने स्टॉक का टारगेट प्राइस भी 1,670 रुपये से घटाकर 1,626 रुपये कर दिया है। बुल्स का कहना है कि कंपनी FY25 की पहली तिमाही में 53.4 करोड़ डॉलर की डील्स हासिल की है। यह पिछली तीन तिमाहियों में सबसे ज्यादा है। जून तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 23 फीसदी बढ़कर 851 करोड़ रुपये रहा। मैनेजमेंट ने FY24 के मुकाबले FY25 में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई है। बेयर्स की दलील है कि वैल्यूएशन और टेलीकॉम सेक्टर की ग्रोथ को लेकर चिंता बनी हुई है। टेलीकॉम बिजनेस में इम्प्रूवमेंट है, लेकिन इसे स्ट्रॉन्ग रिकवरी नहीं कहा जा सकता। कंपनी ने प्रतिद्वंद्वी कंपनियों की तरह बड़ी डील्स के ऐलान नहीं किए हैं।