प्राइमरी (आईपीओ) मार्केट के लिए यह साल शानदार रहा है। जनवरी से जुलाई के बीच 150 से ज्यादा कंपनियों ने आईपीओ से 5 अरब डॉलर से ज्यादा पैसे जुटाए हैं। एलएसईजी के डेटा के मुताबिक, यह पिछले साल की इसी अवधि में जुटाए गए पैसे के मुकाबले करीब दोगुना है। बजट में टैक्स बढ़ाने का असर सेंटिमेंट पर नहीं पड़ा है। सिर्फ जुलाई में 31 कंपनियों के आईपीओ आए हैं। कई आईपीओ खासकर एसएमई सेगमेंट के आईपीओ ने निवेशकों को तगड़ा रिटर्न दिया है। आईपीओ पेश करने वाली करीब 50 फीसदी कंपनियों के शेयरों की कीमतें अब भी 100 फीसदी से ज्यादा ऊपर चल रही हैं। ऐसे में 2 अगस्त को खुलने वाले ओला इलेक्ट्रिक के आईपीओ में निवेशक काफी दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
ज्यादातर सेक्टर में वैल्यूएशन को लेकर चिंता
हालांकि, हाल में कुछ हाई प्रोफाइल आईपीओ खासकर न्यू एज कंपनियों के आईपीओ में निवेशकों ने उम्मीद से कम दिलचस्पी दिखाई। इससे उन निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर पड़ सकता है, जो मार्केट में यह देखते हुए पैसा लगा रहे हैं कि सूचकांक लगातार नए हाई बना रहे हैं। उधर, दिग्गज इनवेस्टर्स बार-बार यह कह रहे हैं कि फाइनेंशियल्स और आईटी को छोड़ ज्यादातर सेक्टर में वैल्यूएशन काफी बढ़ गई है। लोकसभा चुनावों से पहले ज्यादा वैल्यूएशन की वजह से इंडियन मार्केट से दूरी बनाने वाले विदेशी निवेशकों का मन भी बदल गया है। यह कैपिटल मार्केट में जलवायु परिवर्तन जैसी स्थिति है, क्योंकि लिक्विडिटी मार्केट के फंडामेंटल्स पर भारी पड़ रही है।
अजंता फार्मा का शेयर 31 जुलाई को 6.2 फीसदी के उछाल के साथ 2,687.50 रुपये पर बंद हुआ था। पहली तिमाही में Ajanta Pharma के प्रॉफिट और रेवेन्यू बाजार की उम्मीद से बेहतर रहे हैं। बुल्स का कहना है कि कंपनी का बिजनेस मॉडल डायवर्सिफायड है। यह इंडिया के अलावा अफ्रीका और एशियाई बाजारों में भी मौजूद है। अमेरिका में जेनेरिक मार्केट में इसकी अच्छी पैठ है। इससे आगे अच्छी ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। कंपनी का 75 फीसदी रेवेन्यू ब्रांडेड बिजनेस से आता है। उधर, बेयर्स की दलील है कि रेगुलेटरी एप्रूवल में देरी, करेंसी के एक्सचेंज रेट में उतारचढ़ाव और यूएसएफडीए की जांच से जुड़े मसलों का असर कंपनी की अर्निंग्स ग्रोथ पर पड़ सकता है।
टाटा कंज्यूमर के शेयर 31 जुलाई को बगैर किसी बदलाव के 1,188 रुपये पर बंद हुए। पहली तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट गिरा है। बुल्स का कहना है कि Tata Consumer का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क स्ट्रॉन्ग है। कंपनी इसका विस्तार कर सकती है। उधर, ग्रामीण इलाकों में डिमांड में रिकवरी से भी कंपनी को मदद मिल सकती है। उधर, बेयर्स की दलील है कि चाय और कॉफी जैसी कमोडिटी की कीमतें बढ़ रही हैं। इसका असर मार्जिन पर पड़ सकता है। सही समय पर कीमतों में इजाफा नहीं किया गया तो इसका असर कंपनी के मार्केट शेयर पर पड़ सकता है। NourishCo सेगमेंट का प्रदर्शन कमजोर रह सकता है।
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ट्रेंट के शेयरों में 31 जुलाई को 4.1 फीसदी तेजी आई। यह 5.849 रुपये पर बंद हुआ। बीते 8 दिनों में यह Trent का शेयर 12 फीसदी चढ़ा है। बुल्स का कहना है कि अगर टाटा ग्रुप की यह कंपनी सितंबर में निफ्टी 50 में शामिल की जाती है तो इसके शेयरों में 42.9 करोड़ डॉलर का निवेश आ सकता है। उधर, बेयर्स की दलील है कि बढ़ती महंगाई की वजह से अगर लोगों की खर्च करने की क्षमता में कमी आती है तो इसका असर ट्रेंट के शेयरों पर दिख सकता है। Westside या Zudio स्टोर्स की संख्या बढ़ाने में अगर देर होती है तो इसका असर भी ट्रेंट के शेयरों पर पड़ेगा।