Nifty ने पिछले दो महीनों में काफी उतार-चढ़ाव दिखाया है। पहले निराशा, फिर सावधानी और अब तेजी का मूड दिख रहा है। अभी यह बहुत स्टॉन्ग पॉजिशन में नहीं पहुंचा है, जिसका मतलब है कि इसमें और तेजी की गुंजाइश बची हुई है। बेहतर तिमाही नतीजे, रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शंस, RBI के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की कम उम्मीद और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी खरीदारी की वजह से अभी बाजार का पलड़ा बुल्स की तरफ झुका हुआ दिखता है। निफ्टी में 200 अंक की और तेजी आने पर यह सवाल पैदा होगा कि क्या प्रॉफिट की ग्रोथ वैल्यूएशंस को जस्टिफाई करती है।
कंपनी के मार्च तिमाही के नतीजें अच्छे हैं। हालांकि, ये इतने अच्छे नहीं हैं कि इससे स्टॉक की रिरेटिंग होगी, जिसकी उम्मीद इनवेस्टर्स धैर्य के साथ कर रहे हैं। फंड की ज्यादा कॉस्ट, ऑपरेटिंग एक्सपेंसेज में वृद्धि , लोअर रिवॉल्वर बुक (कार्ड यूजर्स सिर्फ चुका रहे मिनिमम अमाउंट) की वजह से बेहतर नतीजों का असर थोड़ा कम पड़ा। हेल्दी रिवॉल्वर बुक क्रेडिट कार्ड कंपनी की कमाई के लिए बहुत अहम है। इससे कंपनी के मार्जिन को सपोर्ट मिलता है। लेकिन, इंटरेस्ट रेट्स पहले से ज्यादा है जिससे बहुत कम कस्टमर्स अपने आउटस्टैंडिंग को कैरी फॉरवर्ड कर रहे हैं। मोतीलाल ओसवाल के एनालिस्ट्स नितिन अग्रवाल और यश अग्रवाल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, "हमें रिवॉल्वर मिक्स में धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट की उम्मीद है। हालांकि, मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है, क्योंकि बॉरोइंग कॉस्ट और बढ़ने की उम्मीद है।"
Paytm का आईपीओ मार्केट में आने से पहले ही सितंबर 2021 में कारट्रेड टेक के पब्लिक ऑफऱ ने न्यू एज बिजनेसेज के पब्लिक ऑफरिंग के लिए मुश्किल का संकेत दे दिया था। इस शेयर का प्राइस उसके आईपीओ प्राइस का एक-चौथाई रह गया है। इसकी वजह यह है कि ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस वैल्यूएशन को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहा है, जो अब भी बहुत ज्यादा है। चौथी तिमाही के नतीजों से पता चला है कि चीजों में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। लेकिन, अच्छे दिन के लिए अभी काफी इंतजार करना पड़ेगा।
पिछले साल अप्रैल में कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज और नोमुरा ने इस शेयर को लेकर उत्साह दिखाया था। लेकिन, उनके पॉजिटिव रिव्यू का फंड मैनेजर्स और अमीर इंडिविडुअल्स पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। अब नोमुरा ने इस स्टॉक के टारगेट प्राइस को 20 फीसदी घटा दिया है। हालांकि, उसने इस शेयर को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है।
एक तिमाही पहले तक कीमतों में वृद्धि की जो कहानी दिख रही थी, वह अब वॉल्यूम की कहानी बन गई है। इसकी वजह यह है कि कंपनियां जितना मुमकिन है, उतना ज्यादा बेचने को कोशिश कर रही हैं। इंडस्ट्री के दिग्गज अनिल सिंघवी के मुताबिक, अगले महीने कीमतों में वृद्धि दिख सकती है या इसे अक्टूबर तक टाला जा सकता है। हाई फ्यूल कॉस्ट का असर अब भी मार्जिन पर पड़ रहा है। अभी कोई कंसॉलिडेशन स्टोरी नहीं दिख रही है, जिसमें बड़ी कंपनियां छोटी कंपनियों को खरीदती हैं। सिंघवी का कहना है कि बड़ी सीमेंट कंपनियां नई कैपेसिटी के लिए अधिग्रहण से पहले अपनी मौजूदा क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर लेना चाहती हैं।