बैंक डिपॉजिट की सुस्त ग्रोथ ने आरबीआई और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हाल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकारी बैंकों के चेयरमैन के साथ एक बैठक की। इसमें डिपॉजिट बढ़ाने सहित दूसरे मसलों पर चर्चा हुई। उधर, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंकों को क्रेडिट और डिपॉजिट के बढ़ते फर्क पर नजर रखनी चाहिए ताकि लिक्विडिटी की कमी न हो। कई लोग पिछले एक साल में स्टॉक मार्केट में आई तेजी का कारण बैंकों के डिपॉजिट में कमी को मानते हैं। सवाल है कि कोई निवेशक बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 7 फीसदी रिटर्न में दिलचस्पी दिखाएगा या 26 फीसदी रिटर्न वाले इंडेक्स फंड में निवेश करना पसंद करेगा? क्या बैंकों में डिपॉजिट में आ रही कमी का संबंध वास्तव में शेयर बाजार या म्यूचुअर फंडों में बढ़ते निवेश से हैं?
