Short Call: भारतीय शेयर बाजार इस समय जोश से भरे हुए हैं, लेकिन क्या यह जोश एक खतरनाक दिशा में जा रहा है? ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा कि कुछ सेक्टर्स भारतीय इकोनॉमी की लंबी-अवधि की मजबूत ग्रोथ संभावनाओं को दिखाते हैं। वहीं कुछ सेक्टर में बिना मजबूत फंडामेंटल के भारी तेजी देखी जा रही है। Nifty का पिछले 12-महीने का P/E रेशियो फिलहाल 24x है, जो इसके लंबी अवधि के औसत 22.5x से अधिक है। Nifty 50 के आधे से अधिक स्टॉक्स इस समय 30x के P/E से ऊपर कारोबार कर रहे हैं। बफे इंडिकेटर (Buffett Indicator) जो मार्केट कैपिटलाइजेशन को GDP से मापता है, अब 143% पर है, जो बाजार में बुलबुला बनने की ओर इशारा करता है। इसके बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) लगातार बाजार को ऊपर धकेल रहे हैं।
इससे इकोनॉमिक सर्वे 2023-24 में बफे इंडिकेटर का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई थी कि बाजार में लोगों का हद से अधिक बढ़ता भरोसा और अटकलें खतरे का संकेत हो सकती हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'Buffett Indicator' का ऊंचा स्तर हमेशा किसी क्रैश का संकेत नहीं होता है, लेकिन यह बाजार की अस्थिरता का संकेत जरूर देता है।
एनालिस्ट्स यह भी कह रहे हैं कि भारतीय बाजार में DIIs के जरिए लगातार निवेश हो रहा है, जो बाजार को ऊंचाई पर बनाए रखने में मदद कर रहा है। लेकिन बाजार के बारे में यह भी एक बात कुख्यात है कि - यह धीरे-धीरे ऊपर चढ़ता है और कभी भी तेजी से नीचे आ सकता है।
जुबिलेंट इंग्रेविया के शेयर 6 सितंबर को 3.27 फीसदी की गिरावट के साथ 714 रुपये के भाव पर बंद हुए। ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने इस शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाते हुए इसे 'Buy' रेटिंग दी है। बुल्स का कहना है कि स्पेशयलिटी केमिकल्स के कुछ सेगमेंट में कंपनी ग्लोबल स्तर पर सबसे आगे हैं। उसके पास सबसे कम लागत वाली पाइरीडीन मैन्युफैक्चरिंग है, जो उसे कॉम्पिटीशन में बढ़त दिलाती है। साथ ही कंपनी ने कच्चे माल की लागत को स्थिर करने के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन कर रही है। फार्मा और एग्रोकेमिकल्स में मजबूत मांग से भी भी कंपनी को लगातार अपनी ग्रोथ बनाए रखने में मदद मिल रही है।
वहीं बीयर्स का कहना है कि कंपनी को एसिटिक एसिड की कीमत में उतार-चढ़ाव से जोखिम का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर इसके एक अहम केमिकल इंटरमीडियरीज सेगमेंट पर असर पड़ रहा है। इस सेगमेंट का कंपनी की अर्निंग्स में अहम योगदान होता है। कुछ उत्पादों पर रेगुलेटर्स की ओर से प्रतिबंध और डाइकेटीन केमिस्ट्री जैसे नए सेगमेंट में तेजी से बढ़ता कॉम्पिटीशन इसकी मार्केट लीडरशिप और मुनाफे को खतरे में डाल सकती है।
वोडाफोन आइडिया के शेयर शुक्रवार 6 सितंबर को 11 फीसदी की गिरावट के साथ 13.4 रुपये के भाव पर बंद हुए थे। ब्रोकरेज फरर्म गोल्डमैन सैक्स ने स्टॉक पर 'सेल' रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि यह शेयर करीब 83 फीसदी गिरकर 2.5 रुपये के भाव तक आ सकता है। बुल्स का कहना है कि कंपनी 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की योजना बना रही है, हालांकि इसके लिए समयसीमा तय नहीं की गई है। अगरर यह माना जाएगा कंपनी कम से कम अगले दो साल अपने टैरिफ में सालाना बढ़ोतरी जारी रखेगी, तो वित्त वर्ष 2027 तक इसके EBITDA के 41,200 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
वहीं बियर्स का कहना है कि कंपनी ने हाल में जो पूंजी जुटाई है वह एक तरह से पॉजिटिव खबर है। लेकिन फिर भी यह कंपनी की गिरते मार्केट शेयर को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। उम्मीद है कि अगले 3-4 सालों में इसकी राइवल कंपनियां अपने कैपेक्स पर इससे 50 प्रतिशत अधिक खर्च करेंगी, जिससे वोडाफोन आइडिया का मार्केट शेयर 3 फीसदी तक घट जाएगा। कंपनी को कैश फ्लो के स्तर पर ब्रेकइवन के लिए प्रति यूजर्स औसत रेवेन्यू (ARPU) को 200-270 रुपये तक बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसकी मध्यम अवधि में संभावना कम दिखती है।
गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर शुक्रवार 6 सितंबर को 11 फीसदी की बढ़त के साथ 7,115 रुपये के भाव पर बंद हुए। कंपनी आगामी एजीएम में 2:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने पर विचार करेगी। इस बीच बीना मोदी को कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है। हाल ही में इसने अपनी रिटेल इकाई 24सेवन को भी बेचा है। बुल्स का कहना है कि बोनस इश्यू से कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन पर कोई खास असर नहीं पड़ता, लेकिन यह निवेशकों के लिए भावनात्मक रूप से पॉजिटिव खबर है।
वहीं बियर्स का कहना है कंपनी को लेकर लगातार आ रही खबरों से इसके स्टॉक की वोलैटिलिटी पर असर पड़ सकता है, जिसे स्टॉक एक्सचेंजों ने पहले से ही अपनी लंबी अवधि की निगरानी सूची (ASM फ्रेमवर्क) में डाला हुआ है। इसके अलावा पिछले 5 सालों में, कंपनी की सालाना सेल्स ग्रोथ एकल अंकों में ही रही है।
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