Silver Crash: अपने पीक से ₹168000 सस्ती हुई चांदी, अब खरीदने का मौका या भागने में भलाई?
Silver Crash: चांदी अपने पीक से करीब 40 प्रतिशत गिर चुकी है। इससे निवेशकों में चिंता बढ़ी है। एक्सपर्ट से जानिए गिरावट की वजहें, आगे का ट्रेंड और क्या अब निवेश करना सही रहेगा।
टाटा म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिल्वर में अभी भी निवेश का मौका है।
Silver Crash: सिल्वर की तेज रफ्तार तेजी अचानक थम गई है। अब निवेशक समझ नहीं पा रहे कि आगे क्या होगा। 2025 में यह सबसे तेज भागने वाले एसेट्स में था, करीब 170 प्रतिशत तक रिटर्न दिया। इसके बाद जनवरी 2026 में इसमें 74 प्रतिशत की और उछाल आई। इसने जनवरी 2026 में MCX पर करीब ₹4,04,500 प्रति किलो का रिकॉर्ड बनाया था।
लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। फिलहाल सिल्वर 2025 के क्लोजिंग लेवल 2.41 लाख रुपये से नीचे ट्रेड कर रहा है, यानी इस साल की पूरी कमाई खत्म हो चुकी है। साथ ही, चांदी अपने ऑल टाइम हाई से 40% से ज्यादा गिर चुकी है। मंगलवार को चांदी का भाव करीब 2.36 लाख रुपये प्रति किलो थी।
इस गिरावट ने पुराने और नए दोनों तरह के निवेशकों को चौंका दिया है। कई लोग अब अपनी हिस्सेदारी घटाकर सुरक्षित विकल्पों की तरफ जा रहे हैं।
गिरावट की असली वजह क्या है
सिल्वर की हालिया गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है मजबूत अमेरिकी डॉलर। जब डॉलर मजबूत होता है, तो बाकी देशों के लिए सिल्वर महंगा हो जाता है और मांग घटती है।
इसके साथ ही, ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद भी असर डाल रही है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग ऐसे एसेट्स में पैसा लगाना पसंद करते हैं जहां उन्हें नियमित रिटर्न मिले। सिल्वर ऐसा एसेट नहीं है, इसलिए इसमें निवेश कम होता है। तीसरा बड़ा कारण है मुनाफा निकालना। लंबे समय तक तेजी रहने के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक करना शुरू किया, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
इंडस्ट्रियल डिमांड क्यों जरूरी है
सिल्वर सिर्फ निवेश का जरिया नहीं है, बल्कि इसका बड़ा इस्तेमाल उद्योगों में होता है। इसकी कुल खपत का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा इंडस्ट्रियल यूज में जाता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और दूसरी इंडस्ट्रीज में बढ़ती मांग लंबे समय में इसकी कीमत को सपोर्ट देती है। यही वजह है कि गिरावट के बावजूद इसका फंडामेंटल मजबूत माना जा रहा है।
और कौन से फैक्टर दबाव बना रहे हैं
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का भी असर पड़ा है। आम तौर पर गोल्ड और सिल्वर को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इस बार दोनों में बिकवाली देखने को मिली।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने और अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों ने कैश रखना ज्यादा सुरक्षित समझा। ऐसे माहौल में कई बार अच्छे एसेट्स भी बिक जाते हैं, क्योंकि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करना होता है या मार्जिन की जरूरत पूरी करनी होती है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और मजबूत डॉलर भी सिल्वर पर दबाव बना रहे हैं।
क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए
टाटा म्यूचुअल फंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिल्वर में अभी भी निवेश का मौका है। अगर कीमतों में गिरावट डॉलर की मजबूती या तनाव कम होने की वजह से आती है, तो उसे खरीदारी के मौके की तरह देखा जा सकता है।
रिपोर्ट कहती है कि लंबी तेजी के बाद इस तरह की गिरावट सामान्य होती है और इससे लंबे समय का नजरिया खराब नहीं होता। सिल्वर के फंडामेंटल अभी भी मजबूत हैं।
गिरावट पर खरीदारी की रणनीति
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि निवेशकों को ऊंचे स्तर पर खरीदारी करने के बजाय 'बाय ऑन डिप्स' यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए। हाल की तेजी के बाद छोटे समय में कीमतों में ठहराव या हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है।
ब्रोकरेज के मुताबिक, निवेशक कई रास्तों से निवेश कर सकते हैं, जैसे गोल्ड और सिल्वर ETF, एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स या फिजिकल बुलियन। धीरे-धीरे पारंपरिक खरीदारी की जगह फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स की ओर झुकाव बढ़ता दिख रहा है।
टेक्निकल लेवल क्या कह रहे हैं
इस समय एमसीएक्स सिल्वर करीब 2,45,200 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसने 2,44,400 रुपये के रेजिस्टेंस को पार कर लिया है।
अब अगला रेजिस्टेंस 2,46,000 रुपये पर है। अगर यह स्तर पार होता है, तो कीमत 2,47,000 से 2,48,000 रुपये तक जा सकती है।
आगे सपोर्ट कहां से मिलेगा
सिल्वर की सबसे बड़ी ताकत इसकी इंडस्ट्रियल डिमांड है, जो कुल खपत का 60 प्रतिशत से ज्यादा है। इसके अलावा चीन से लगातार निवेश मांग भी बनी हुई है।
सप्लाई की बात करें तो पिछले पांच साल से सिल्वर में डेफिसिट चल रहा है और अब छठे साल में पहुंच चुका है। शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज में इन्वेंट्री भी काफी कम स्तर पर है, जो सप्लाई की तंगी दिखाता है।
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