शेयर बाजार में गिरावट का असर नहीं! 15% बढ़ा SIP में निवेश, फरवरी में आए ₹29845 करोड़

शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बावजूद रिटेल निवेशकों का भरोसा SIP में बना हुआ है। फरवरी 2026 में SIP निवेश करीब 15 प्रतिशत बढ़कर 29,845 करोड़ रुपये पहुंच गया। इससे म्यूचुअल फंड में लॉन्ग टर्म निवेश का रुझान मजबूत दिख रहा है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 16, 2026 पर 10:28 PM
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SIP में निवेश करने वाले खातों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

शेयर बाजार में हाल के महीनों में बढ़ी अस्थिरता के बावजूद म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के जरिए रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ती रही है। ICRA Analytics के जारी आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2026 में SIP के जरिए निवेश में सालाना आधार पर अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

फरवरी 2026 में SIP के जरिए कुल 29,845 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। यह फरवरी 2025 के 25,999 करोड़ रुपये की तुलना में 14.79 प्रतिशत ज्यादा है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में उतार चढाव के बावजूद रिटेल निवेशकों का भरोसा बना हुआ है और वे नियमित निवेश जारी रखे हुए हैं।

मासिक आधार थोड़ी गिरावट


हालांकि मासिक आधार पर SIP निवेश में थोड़ी गिरावट देखने को मिली। जनवरी 2026 में SIP के जरिए 31,002 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जो फरवरी में 3.73 प्रतिशत घटकर 29,845 करोड़ रुपये रह गया।

यह गिरावट मुख्य रूप से बाजार में उतार चढ़ाव की वजह से मानी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद कुल निवेश स्तर मजबूत बना हुआ है।

SIP खातों की संख्या बढ़ी

SIP में निवेश करने वाले खातों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। फरवरी 2026 में SIP में योगदान देने वाले खातों की संख्या बढ़कर 9.44 करोड़ हो गई, जबकि एक साल पहले फरवरी 2025 में यह 8.26 करोड़ थी।

वहीं कुल सक्रिय SIP खातों की संख्या भी बढ़कर 10.45 करोड़ हो गई है। फरवरी 2025 में यह संख्या 10.17 करोड़ थी। इससे साफ होता है कि नए निवेशक लगातार SIP के जरिए बाजार से जुड़ रहे हैं।

16.64 लाख करोड़ रुपये का AUM

Association of Mutual Funds in India यानी AMFI के आंकड़ों के मुताबिक SIP के जरिए निवेश की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) करीब 16.64 लाख करोड़ रुपये रही।

यह म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल संपत्ति का लगभग 20.29 प्रतिशत हिस्सा है, जो SIP की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है।

मार्केट करेक्शन से वैल्यू पर असर

रिपोर्ट के मुताबिक SIP से जुड़ी कुल संपत्ति में जो हल्का उतार चढ़ाव देखा गया है, वह मुख्य रूप से मार्क टू मार्केट करेक्शन की वजह से है। यानी बाजार में कीमतों के बदलने से निवेश की वैल्यू प्रभावित हुई है, न कि निवेशकों की दिलचस्पी कम होने से।

लॉन्ग टर्म की है प्लानिंग

कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि 2026 की शुरुआत में भी SIP निवेश का ग्रोथ ट्रेंड बना हुआ है। बाजार में शॉर्ट टर्म उतार चढ़ाव के बावजूद रिटेल निवेशक अनुशासित तरीके से लंबे समय के निवेश पर टिके हुए हैं।

इंडस्ट्री के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि भारत में रिटेल निवेशक अब तेजी से म्यूचुअल फंड, खासकर इक्विटी आधारित स्कीम और SIP को लंबी अवधि की बचत और निवेश का बेहतर विकल्प मान रहे हैं। घरेलू बचत के तरीकों और निवेश व्यवहार में आए बदलाव भी इसके पीछे एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

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