मार्केट की चाल बदलने वाली है, लार्जकैप्स के मुकाबले स्मॉलकैप्स शेयर 35-40% ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं

मार्केट की चाल बदलने पर स्मॉलकैप शेयरों का रिटर्न लार्जकैप शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा रह सकता है। अगले 6 महीनों में उनका रिटर्न लार्जकैप के मुकाबले 35-40 फीसदी तक ज्यादा रह सकता है। केडियानॉमिक्स के फाउंडर सुशील केडिया ने यह अनुमान जताया है

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 10:19 AM
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केडियानॉमिक्स के फाउंडर सुशील केडिया का कहना है कि स्मॉलकैप शेयरों में पहले से ही लार्जकैप शेयरों के मुकाबले ज्यादा स्ट्रेंथ के संकेत दिख रहे हैं।

मार्केट की चाल बदलने पर स्मॉलकैप शेयरों का रिटर्न लार्जकैप शेयरों के मुकाबले काफी ज्यादा रह सकता है। अगले 6 महीनों में उनका रिटर्न लार्जकैप के मुकाबले 35-40 फीसदी तक ज्यादा रह सकता है। केडियानॉमिक्स के फाउंडर सुशील केडिया ने यह अनुमान जताया है। उन्होंने मनीकंट्रोल से बातचीत में शेयर बाजार और इनवेस्टमेंट को लेकर कई अहम बातें बताईं।

केडिया ने कहा कि स्मॉलकैप शेयरों में पहले से ही लार्जकैप शेयरों के मुकाबले ज्यादा स्ट्रेंथ के संकेत दिख रहे हैं। यह ट्रेड में संभावित बदलाव का संकेत है। उन्होंमने कहा, "स्मॉलकैप स्टॉक्स ने पहले से ही लार्जकैप इंडेक्स के मुकाबले बढ़त दिखानी शुरू कर दी है... आम तौर पर जब बाजार निचले स्तर से ऊपर आता है तो लार्जकैप स्टॉक्स में बाद में तेजी देखने को मिलती है।"

उन्होंने कहा कि एक बार मार्केट में स्टैबिलिटी आने पर इस ट्रेंड की वजह से स्मॉलकैप स्टॉक्स का प्रदर्शन काफी बेहतर रह सकता है। उन्होंने कहा, "अगले छह महीनों में निफ्टी के मुकाबले स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन 35-40 फीसदी ज्यादा रह सकता है।" उन्होंने कहा कि अगर निफ्टी रिकवरी में 27,000 की तरफ बढ़ता है तो यह 15-17 फीसदी की तेजी होगी। इस दौरान स्मॉलकैप में तेज उछाल आ सकता है। स्मॉलकैप इंडेक्स 50 फीसदी तक चढ़ सकता है। यह निफ्टी के मुकाबले करीब 35 फीसदी ज्यादा रिटर्न होगा।


ऐसा कब तक होगा, यह पूछने पर केडिया ने संकेत दिया का यह 2026 में ही होगा। उन्होंने कहा, "अगर दीवाली तक ऐसा नहीं होता है तो फिर क्रिसमस तक होगा।" उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई की वजह से इंडियन मार्केट्स में तेज गिरावट आई है। मार्केट्स में काफी करेक्शन आया है। मार्केट्स अपने पीक से करीब 15 फीसदी नीचे आ चुके हैं। पीएसयू बैंक, प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में तो मार्च में 13-16 फीसदी की गिरावट आई है।

केडिया ने कहा कि अभी बाजार में जो माहौल है, उसमें सिर्फ जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट का हाथ नहीं है बल्कि इनवेस्टर्स के विहेबियर का भी हाथ है। उन्होंने कहा, "अभी लड़ाई सबसे बड़ा मसला है। लेकिन, वास्तव में दो लड़ाइयां चल रही हैं। पहली खाड़ी इलाके में और दूसरी इनवेस्टर्स के मन में। हमारा फोकस मार्केट्स के अंदर चल रही लड़ाई पर होना चाहिए।"

उन्होंने कहा कि इनवेस्टर्स को मौजूदा लेवल पर बेयरिश पोजीशन लेने से सावधान किया। उन्होंने कहा, "यह शॉर्ट सेल करने का समय नहीं है। यह सबसे खतरनाक ट्रेड होगा...अब बिकवाली के लिए काफी देर हो चुकी है और अभी एग्रेसिव खरीदारी करना भी जल्दबाजारी होगी।" उन्होंने कहा कि बाजार में गिरावट के सुस्त पड़ने के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं।

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