SME IPO से जुटाए पैसे में हेराफेरी करते हैं मर्चेंट बैंकर्स, SEBI की जांच से सामने आया बड़ा घोटाला

SEBI: दो एसएमई कंपनियों के आईपीओ की जांच से हैरान करने वाली जानकारियां सामने आई हैं। सेबी ने इन कंपनियों के आईपीओ से जुटाए गए फंड के इस्तेमाल की जांच की। इससे पता चला कि इन आईपीओ के मर्चेंट बैंकर ने आईपीओ से जुटाए गए पैसे में जमकर हेराफेरी की थी

अपडेटेड May 20, 2025 पर 1:09 PM
SEBI ने Varaya Creations Limited (VRL) के मामले में जो अंतरिम आदेश पारित किया है, उसमें आईपीओ से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

सेबी ने हाल में स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड दो एसएमई कंपनियों के बारे में ऑर्डर जारी किए हैं। पहला ऑर्डर वराया क्रिएशंस (वीसीएल) से जुड़ा है। दूसरा ऑर्डर साइनोपटिक्स टेक्नोलॉजीजी से जुड़ा है। ये दोनों ऑर्डर्स मुख्य रूप से आईपीओ के पैसे के दुरूपयोग से जुड़े हैं। सेबी ने इन कंपनियों के आईपीओ से जुटाए गए फंड के इस्तेमाल की जांच की। इसमें कई हैरान करने वाली बातें देखने को मिलीं। सवाल है कि क्या एसएमई कंपनियां आईपीओ से जुटाए गए पैसे का सही इस्तेमाल कर रही हैं? क्या एसएमई कंपनियों के आईपीओ में मर्चेंट बैंकर की भूमिका पारदर्शी है?

Varaya Creations का आईपीओ 2024 में आया था

SEBI ने Varaya Creations Limited (VRL) के मामले में जो अंतरिम आदेश पारित किया है, उसमें आईपीओ से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर Inventure Merchant Banking Services ने आईपीओ से मिले करीब 71 फीसदी पैसे कई अकाउंट्स में ट्रांसफर किए। उसने दिखाया कि IPO से संबंधित खर्च के पेमेंट के लिए ये पैसे ट्रांसफर किए गए। वराया का आईपीओ अप्रैल 2024 में आया था। कपनी ने आईपीओ से 20.10 करोड़ रुपये जुटाए थे।


आईपीओ डॉक्युमेंट्स में इश्यू का खर्च सिर्फ 60 लाख बताया गया

Varaya के आईपीओ से जुटाए गए 20.10 करोड़ रुपये में से 14 करोड़ रुपये तीन कंपनियों को ट्रांसफर किए गए। यह ट्रांसफर मर्चेंट बैंकर Inventure के कहने पर आईपीओ एस्क्रो अकाउंट से किए गए। यह पैसा कंपनी के अकाउंट में पहुंचने से पहले ही तीन कंपनियों को ट्रांसफर किया गया। इन्हें लिस्टिंग के दिन और उसके अगले दिन ट्रांसफर किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि आईपीओ डॉक्युमेंट्स में इश्यू का खर्च सिर्फ 60 लाख रुपये बताया गया था।

Synoptics Technologies के आईपीओ में भी एक जैसा ट्रेंड दिखा

अब हम Synoptics Technologies Limited के आईपीओ की बात करते हैं। यह कंपनी जुलाई 2023 में स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई थी। यह इश्यू 54.04 करोड़ रुपये का था। इसमें 18.96 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) और 35.08 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू शामिल था। कुल 54.04 करोड़ रुपये में से 19 करोड़ रुपये तीन कंपनियों को ट्रांसफर किए गए। सेबी ने जांच में पाया कि यह पैसा एक्सचेंज से लिस्टिंग की रिसीट मिलने से पहले ही ट्रांसफर कर दिया गया। आईपीओ के डॉक्युमेंट्स में इश्यू का खर्च सिर्फ 80 लाख रुपये बताया गया था।

एसएमई आईपीओ के भोलेभाले निवेशक बन रहे फ्रॉड के शिकार

KRIS के अरुण केजरीवाल ने कहा, "पिछले कुछ महीनों के मामलों को देखने पर ऐसा लगता है कि SME इश्यू से जुड़े लोगों ने सिस्टम की कमियों का फायदा उठाते हुए भोलेभाले निवेशकों के साथ फ्रॉड किया है। अब समय आ गया कि इस मामले में रेगुलेटर को हस्तक्षेप करना चाहिए।" VRL के मामले में मर्चेंट बैंकर Inventure ने तीन कंपनियों को किए गए पैसे के ट्रांसफर को सही बताया है। उसने कहा है कि यह ट्रांसफर इश्यू के डॉक्युमेंट में बताए गए मकसद के मुताबिक किया गया है। इनमें पर्चेंज ऑफ इनवेंट्री और सामान्य कारोबारी जरूरतें शामिल हैं।

सेबी की जांच में हैरान वाले तथ्यों का खुलासा

लेकिन, सेबी के अंतरिम आदेश के मुताबिक, मर्चेंट बैंकर ने पैसे के ट्रांसफर के लिए बैंकों को जो लेटर लिखा था, उसमें इसके दूसरे कारण बताए गए थे। लेटर में कहा गया था कि यह पैसा इश्यू मैनेजमेंट फीस, अंडरराइटिंग और सेलिंग कमिशन के लिए ट्रांसफर किया जा रहा है। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि इस बारे में पूछने पर VCL ट्रांसपर की वजह के बारे में कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाया। Synoptics Technologies ने भी पैसे के ट्रांसफर की सही वजह बताने में नाकाम रही। उसने जो वजहें बताईं वे ऑफर डॉक्युमेंट में बताई गई वजहों से अलग थीं।

एस्क्रो अकाउंट का हो रहा दुरूपयोग 

आईपीओ मार्केट पर करीबी नजर रखने वाले एक मार्केट पार्टिसिपेंट ने बताया, "एस्क्रो अकाउंट का सिस्टम बड़ी कंपनियों के आईपीओ में ठीक तरह से काम करता है, लेकिन SME सेगमेंट में यह साफ है कि मर्चेंट बैंकर मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि पहले एक ऐसा मामला आया था जिसमें इश्यू पेश करने वाली SME कंपनी मर्चेंट बैंकर के लिए सिर्फ एक 'बिलिंग कंपनी' थी। इसका मतलब है कि कंपनी मर्चेंट बैंकर के लिए पब्लिक से कमीशन के आधार पर फंड जुटाने का सिर्फ एक माध्यम थी।

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SEBI को जल्द कदम उठाने होंगे

सेबी के एक पूर्व अधिकारी ने कहा कि यह जटिल मसला है। इश्यू पेश करने वाली कंपनी के पास बैंक से फंड के हर ट्रांसफर के बारे में पूछने का अधिकार नहीं है। इसका सीधा समाधान यह है कि इश्यू पर आने वाले खर्च को छोड़ कोई दूसरा फंड एस्क्रो अकाउंट से इश्यू पेश करने वाली कंपनी के अलावा दूसरी कंपनी को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसके लिए इश्यू से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल को लेकर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट को अनिवार्य बनाया जा सकता है। लेकिन, सेबी को नियमों को सख्त बनाने में यह ध्यान में रखना होगा कि इससे आईपीओ से फंड जुटाने वाली सही कंपनियों के लिए दिक्कत पैदा नहीं हो जाए।

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