Snapdeal IPO:ऑनलाइन मार्केट प्लेस स्नैपडील (Snapdeal) ने मार्केट रेग्यूलेटर सेबी में अपने 1,250 करोड़ रुपए के आईपीओ के लिए अर्जी दाखिल कर दी है। इस IPO से मिले पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपनी विस्तार योजनाओं, लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने और कंपनी के टेक्नोलॉजी प्लेफार्मा को सुधारने में लगाएगी।
आईपीओ के लिए दाखिल किए गए DRHP के मुताबिक इसमें 3 करोड़ से ज्यादा इक्विटी शेयरों का ऑफर फॉर सेल होगा जिसके तहत कंपनी के वर्तमान शेयर धारक अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचेंगे। Axis Capital Ltd, BofA Securities India Ltd, CLSA India Pvt Ltd और JM Financial Ltd इस आईपीओ के बुकरनिंग लीड मैनेजर हैं।
आइए हम इस आईपीओ में निवेश से पहले इससे जुड़े जोखिमों पर डालते हैं एक नजर -
1. गिरती आय - कोरोना महामारी के कारण स्नैपडील की आय में भारी गिरावट देखने को मिली है। वित्त वर्ष 2020-21 में कंपनी की आय़ 471.76 करोड़ रुपये रही है जो पिछले वित्त वर्ष के 846.39 करोड़ रुपये से 44.26 फीसदी कम है। ओमीक्रोन से जुड़े जोखिम को देखते हुए कंपनी के लिए अपनी आय में ग्रोथ लाना मुश्किल नजर आ रहा है।
2. लगातार घाटे में रहना-कंपनी ने अभी तक कभी भी मुनाफा नहीं दिखाया है। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी को 125.44 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था जबकि वित्त वर्ष 2020 में कंपनी को 273.54 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। सितंबर 2021 को समाप्त 9 महीने में कंपनी को 177.08 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। हालांकि भारतीय इकोनॉमी रिकवरी के मोड में है लेकिन कंपनी के मुनाफे की स्थित में कोई बड़ा फेरबदल होना मुश्किल नजर आ रहा है।
3. अनिश्चित भविष्य - स्नैपडील ने आईपीओ के ड्राफ्ट पेपर में खुद इस बात को स्वीकार किया है कि वह कंपनी के टर्नअराउंड को लेकर अनिश्चय की स्थिति में है। भविष्य में कंपनी को घाटा हो सकता है। कंपनी ने ड्राफ्ट पेपर में आगे कहा है कि अगर हम डिलीवरी अथवा NMV बढ़ाने में असफल रहते है और किफायती तरीके से नए उपभोक्ता जोड़ने में सफलता नहीं मिलती तो हमारे लिए मुनाफे में आना मुश्किल होगा। अगर कंपनी लगातार घाटे में रहती है तो कंपनी के कारोबार और उसके शेयरों की वैल्यू पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
4. निगेटिव कैशफ्लो- कई सालों से कंपनी का कैशफ्लो निगेटिव रहा। वित्त वर्ष 2021 में कंपनी के कामकाज में इस्तेमाल हुआ नेट कैश 91.4 करोड़ रुपये निगेटिव रहा है जो कि इसके पिछले साल 3718 करोड़ रुपये निगेटिव था। कंपनी ने ड्राफ्ट पेपर में कहा है कि भविष्य में कोई निगेटिव कैशफ्लो कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर निगेटिव प्रभाव डाल सकती है और हम इस बात का भी आश्वासन नहीं दे सकते कि कंपनी का कैशफ्लो पॉजिटीव हो जाएगा।
5. मर्केडाइज वैल्यू में गिरावट- वित्त वर्ष 2021 में स्नैपडील की नेट मर्केंडाइज वैल्यू (NMV) इसके पिछले साल के 1,760.99 करोड़ रुपये से गिरकर 912.37 करोड़ रुपये पर आ गई है। इसी तरह डिलिवर्ड यूनिट भी सालाना आधार पर 3.45 करोड़ रुपये से घटकर 1.85 करोड़ रुपये पर आ गई है।
6. कड़ा मुकाबला- स्नैपडील को अमेजोन और फिल्पकॉर्ट जैसे बड़े खिलाड़ियों का सामना करना है। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो मार्ट भी मैदान में है जो लगातार अपने कारोबार में विस्तार कर रहे हैं।
7. मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर- स्नैपडील ने कहा है कि मैक्रो इकोनॉमिक स्थितियां भी अगर अनूकूल नहीं रहीं तो कंपनी के कारोबार पर चोट पड़ सकती है। अगर किसी खास बाजार या ग्लोबल इकोऩॉमी में सामान्य कारोबारी स्थितियां खराब होती है तो कंज्यूमर अपना खर्च घटा सकते हैं। उपभोक्ताओं के खर्च घटाने पर कंपनी के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
8 . नीतियों में बदलाव- सरकार कंज्यूमर प्रोटेक्शन (E-Commerce) कानूनों में बदलाव करने की तैयारी में है। जिसके तहत ऑनलाइन रिटेलर्स के लिए रजिस्ट्रेशन के नियम, फ्लैशसेल पर प्रतिबंध, प्राइवेट लेवल ब्रांडों के प्रमोशन पर प्रतिबंध, ऑनलाइन मार्केट प्लेस ऑपरेटर और उनके वेंडर के बीच संबंधों की निगरानी से संबंधित कानून बनाए जा सकते हैं। स्नैपडील को डर है कि अगर इस तरह के कानून लागू होते हैं तो परेशानी पैदा हो सकती है।
9. वेतन लागत में बढ़ोतरी- अगर सरकार द्वारा हाल में पेश wage code लागू हो जाता है तो कंपनियों और उनके कर्मचारियों के बीच निर्धारित कामकाज के तरीकों में भारी फेरबदल होगा। इससे कर्मचारियों के काम करने की अवधि, उनकी टेक होम सैलरी और उनके दूसरे अधिकारों में काफी अहम बदलाव आएंगे। जिससे कंपनियों के लेबर कॉस्ट में बढ़ोतरी हो सकती है। स्नैपडील को भी इस बढ़ती लागत का सामना करना पड़ सकता है।