Get App

क्रूड ऑयल चिंता की इकलौती वजह नहीं है, विदेशी निवेशकों के रुख सहित ये चीजें भी बाजार का खेल बिगाड़ सकती हैं

मिडिलईस्ट में तनाव बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है। ऐसा होने पर इंडिया के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। इसका सीधा असर करेंट अकाउंट डेफिसिट पर पड़ेगा।। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Apr 15, 2024 पर 1:36 PM
क्रूड ऑयल चिंता की इकलौती वजह नहीं है, विदेशी निवेशकों के रुख सहित ये चीजें भी बाजार का खेल बिगाड़ सकती हैं
सरकार ने हाल में मॉरीशस के साथ डबल टैक्स से बचाव के समझौते की एक बड़ी कमी दूर करने के लिए नियमों में संशोधन किया है। अभी यह साफ नहीं है कि यह संशोधन 2017 से पहले हुए निवेश पर लागू होगा या नहीं।

इजराइल पर ईरान के हमले के बाद मध्यपूर्व में तनाव बढ़ा है। इससे आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतें हाई बने रहने की उम्मीद है। कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि मई में क्रूड ऑयल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है। इसका खराब असर इंडिया के करेंट अकाउंट डेफिसिट पर पड़ेगा। यह कंपनियों की अर्निंग्स के लिए भी खराब रहेगा। इनफ्लेशन की वजह से इनपुट कॉस्ट्स बढ़ जाती है जिसका असर डिमांड पर पड़ता है। इससे स्टॉक मार्केट में तेजी पर ब्रेक लग सकता है। हालांकि, ज्यादातर बुल्स का मानना है कि घरेलू संस्थागत निवेश स्ट्रॉन्ग बना हुआ है और लोकसभा चुनावों में BJP की जबर्दस्त जीत से सारी मुश्किलें खत्म हो जाएगी। हालांकि, कुछ ऐसी वजहें हैं, जो बाजार को ज्यादा बढ़ने से रोक सकती हैं।

विदेशी निवशकों का सेलेक्टिव एप्रोच

विदेशी निवेशकों ने 2024 में अब तक शुद्ध रूप से 24,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि इसमें से ज्यादातर निवेश ब्लॉक डील्स के जरिए हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक निवेश में सावधानी बरत रहे हैं।

रेगुलेटर्स की सख्ती

सरकार ने हाल में मॉरीशस के साथ डबल टैक्स से बचाव के समझौते की एक बड़ी कमी दूर करने के लिए नियमों में संशोधन किया है। अभी यह साफ नहीं है कि यह संशोधन 2017 से पहले हुए निवेश पर लागू होगा या नहीं। 2017 में पहली बार कैपिटल गेंस के नियमों में बदलाव हुआ था। इस संशोधन का सबसे ज्यादा असर मॉरीशस के रास्ते आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर पड़ेगा। इस बात को लेकर भी चिंता है कि दूसरे टैक्स हैवेंस से होने वाले निवेश पर भी शिकंजा कसेगा।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें