Solar Stocks Crash: वारी और प्रीमियर एनर्जी के शेयर 14% तक धड़ाम, US के एक फैसले से सोलर स्टॉक्स में हाहाकार

Solar Stocks Crash: भारतीय सोलर कंपनियों के शेयरों में आज 25 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। वारी एनर्जीज और प्रीमियर एनर्जीज समेत इस सेक्टर के कई शेयर 14 फीसदी तक टूट गए। यह गिरावट अमेरिकी सरकार के एक फैसले के बाद आई। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है

अपडेटेड Feb 25, 2026 पर 11:03 AM
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Solar Stocks Crash: वारी एनर्जीज (Waaree Energies) के शेयर शुरुआती कारोबार में लोअर सर्किट के करीब पहुंच गए थे

Solar Stocks Crash: भारतीय सोलर कंपनियों के शेयरों में आज 25 फरवरी को भारी गिरावट देखने को मिली। वारी एनर्जीज और प्रीमियर एनर्जीज समेत इस सेक्टर के कई शेयर 14 फीसदी तक टूट गए। यह गिरावट अमेरिकी सरकार के एक फैसले के बाद आई। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और सोलर पैनल पर भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए।

वारी एनर्जीज (Waaree Energies) का शेयर सुबह करीब 9:30 बजे तक 14.6% गिरकर ₹2,580.5 पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में यह लोअर सर्किट के करीब पहुंच गया था। प्रीमियर एनर्जीज (Premier Energies) के शेयर भी 12% से ज्यादा गिरकर 681 रुपये के स्तर पर आ गए।

दूसरे सोलर शेयर भी दबाव में

यह गिरावट सिर्फ दो कंपनियों तक सीमित नहीं रही। विक्रम सोलर (Vikram Solar) में लगभग 7% की कमजोरी आई। वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज (Waaree Renewable Technologies) 6% से ज्यादा फिसल गया। सोलेक्स एनर्जी में करीब 5% और सात्विक ग्रीन एनर्जी में लगभग 3% की गिरावट देखने को मिली। बोरोसिल रिन्यूएबल्स के शेयर में 1% से ज्यादा की गिरावट आई।


हालांकि, सर्वोटेक रिन्यूएबल पावर सिस्टम्स में हल्की बढ़त देखी गई, जबकि स्टर्लिंग एंड विल्सन रिन्यूएबल एनर्जी में मामूली गिरावट रही।

अमेरिका का बड़ा फैसला

यह गिरावट अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें भारत से आयात होने वाले सोलर सेल और पैनल पर लगभग 126% की प्रारंभिक काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने का ऐलान किया गया है। अमेरिका का आरोप है कि भारतीय कंपनियों को अनुचित सरकारी सब्सिडी का फायदा मिल रहा है, जिससे वे कम कीमत पर उत्पाद बेच पा रही। इससे अमेरिकी कंपनियों को कॉम्पिटीशन में नुकसान हुआ। भारत के अलावा इंडोनेशिया और लाओस से आने वाले सोलर उत्पादों पर भी भारी काउंटरवेलिंग ड्यूटी (CVD) लगाई गई है।

अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट की फैक्ट शीट के मुताबिक, इंडोनेशिया पर 104.38% और लाओस पर 80.67% ड्यूटी तय की गई है।

अमेरिकी इंडस्ट्री की दलील

यह शिकायत 'अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड' ने की थी। इसमें साउथ कोरिया की हनवा क्यूसेल्स, एरिजोना की फर्स्ट सोलर और टेक्सास की मिशन सोलर जैसी कंपनियां शामिल हैं। ग्रुप का कहना है कि सब्सिडी वाले इंपोर्ट से अरबों डॉलर के घरेलू निवेश और नौकरियों पर खतरा है।

अलायंस के लीड अटॉर्नी टिम ब्राइटबिल ने कहा कि यह फैसला निष्पक्ष कॉम्पिटीशन बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने एक बयान में कहा, "अमेरिकी कंपनियां घरेलू कैपेसिटी को फिर से बनाने और अच्छी सैलरी वाली नौकरियां बनाने के लिए अरबों डॉलर इन्वेस्ट कर रही हैं। अगर गलत तरीके से ट्रेड किए गए इंपोर्ट को मार्केट को बिगाड़ने दिया गया तो ये इन्वेस्टमेंट सफल नहीं हो सकते।"

दो चरणों में होगा फैसला

यह इस मामले में पहला फैसला है। अगले महीने अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट यह भी तय करेगा कि क्या इन देशों की कंपनियों ने अमेरिका में अपने उत्पाद उत्पादन लागत से कम कीमत पर बेचे। अगर डंपिंग का आरोप सही पाया गया तो इन देशों पर अतिरिक्त एंटी-डंपिंग ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।

व्यापार पर असर

व्यापार आंकड़ों के अनुसार भारत, इंडोनेशिया और लाओस से अमेरिका ने पिछले साल करीब 4.5 अरब डॉलर का सोलर आयात किया। यह कुल अमेरिकी सोलर आयात का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले से भारतीय सोलर एक्सपोर्टरों पर दबाव बढ़ सकता है।

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