3 दिन में 60% उछला SpaceX का शेयर, भारतीय निवेशक भी छोटी रकम के साथ कर सकते हैं निवेश

SpaceX Share Price: एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX के शेयर ने लिस्टिंग के बाद महज तीन दिनों में 60% से ज्यादा उछाल दर्ज किया है। इस तेजी ने दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान खींचा है। अच्छी बात यह है कि भारतीय निवेशक छोटी रकम के साथ भी इसमें निवेश कर सकते हैं।

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 10:06 PM
मंगलवार, 16 जून को कारोबार के दौरान शेयर में 12.40% की और तेजी आई।

अमेरिकी कारोबारी एलॉन मस्क की कंपनी SpaceX ने शेयर बाजार में धमाकेदार शुरुआत की है। कंपनी का शेयर IPO के बाद सिर्फ दो कारोबारी दिनों में 42% से ज्यादा उछल चुका है। इस तेजी ने दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान खींचा है। अच्छी बात यह है कि भारतीय निवेशकों को इसमें निवेश करने के लिए पूरा एक शेयर खरीदने की जरूरत नहीं है। वे कुछ हजार रुपये से भी निवेश शुरू कर सकते हैं।

12 जून को SpaceX का शेयर 135 डॉलर के IPO प्राइस के मुकाबले 150 डॉलर पर लिस्ट हुआ था। पहले ही दिन यह 19% की बढ़त के साथ 161 डॉलर पर बंद हुआ। इसके बाद 15 जून को दूसरे कारोबारी दिन शेयर में 19.6% की तेजी आई और यह 192.50 डॉलर पर बंद हुआ।

मंगलवार, 16 जून को कारोबार के दौरान शेयर में 12.40% की और तेजी आई। इससे यह 216.38 डॉलर तक पहुंच गया। इस स्तर पर देखें तो शेयर IPO कीमत 135 डॉलर के मुकाबले करीब 60.3% और लिस्टिंग प्राइस 150 डॉलर के मुकाबले लगभग 44.3% ऊपर कारोबार कर रहा था।


5,000 रुपये से कैसे करें निवेश?

करीब 200 डॉलर के भाव पर SpaceX का एक शेयर खरीदने के लिए भारतीय निवेशक को लगभग 19,000 रुपये खर्च करने होंगे। लेकिन अमेरिकी बाजार में फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध है।

इसके तहत निवेशक पूरे शेयर की बजाय उसका एक हिस्सा भी खरीद सकते हैं। इसलिए कुछ सौ रुपये से लेकर अपनी सुविधा के मुताबिक किसी भी रकम से निवेश शुरू किया जा सकता है। जैसे कि आप SIP करते हैं 500, 1000 या फिर 5000 रुपये।

क्या होती है Fractional Investing?

फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग का मतलब किसी शेयर का पूरा एक शेयर खरीदने की बजाय उसका एक हिस्सा खरीदना है।

मान लीजिए SpaceX का एक शेयर 200 डॉलर का है और आप उसमें 50 डॉलर निवेश करते हैं। ऐसे में आपके पास पूरे शेयर की बजाय उसका 25% हिस्सा होगा। यानी शेयर महंगा होने पर भी निवेशक छोटी रकम से उसमें निवेश कर सकते हैं। इसी वजह से महंगे अमेरिकी शेयर भी छोटे निवेशकों की पहुंच में आ जाते हैं।

SIP की तरह निवेश का विकल्प

फ्रैक्शनल इन्वेस्टिंग का एक और फायदा डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग (DCA) है। यह काफी हद तक SIP की तरह काम करता है। निवेशक हर महीने एक तय रकम निवेश कर सकता है। जब शेयर सस्ता होता है तो ज्यादा हिस्सा मिलता है और महंगा होने पर कम हिस्सा मिलता है। इससे लंबे समय में खरीद की औसत लागत संतुलित रह सकती है।

इस सुविधा की मदद से Tesla, Nvidia, Amazon, Microsoft और Apple जैसी कंपनियों में भी छोटे-छोटे निवेश किए जा सकते हैं। इससे सीमित बजट में भी ग्लोबल पोर्टफोलियो बनाना आसान हो जाता है।

निवेश से पहले जोखिम भी समझें

हालांकि SpaceX में निवेश पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं है। 17 जून से शेयर में ऑप्शंस ट्रेडिंग शुरू होने वाली है, जिससे उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसके अलावा लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद शुरुआती निवेशकों और संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी देखने को मिल सकती है।

इसलिए तेजी देखकर जल्दबाजी में निवेश करने के बजाय जोखिम और वैल्यूएशन दोनों को समझना जरूरी है।

अमेरिका की चौथी बड़ी कंपनी स्पेसएक्स?

स्पेसएक्स मंगलवार को 12% से ज्यादा चढ़ गया। इससे उसका कुल मार्केट वैल्यू माइक्रोसॉफ्ट से भी ज्यादा हो गया। इस बढ़त के साथ मस्क की रॉकेट और सैटेलाइट कंपनी स्पेसएक्स अमेरिका की चौथी सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनी बन गई। दुनिया भर में अब केवल Apple, Nvidia और Saudi Aramco ही उससे आगे हैं।

दिन के दौरान एक समय स्पेसएक्स का मार्केट कैप लगभग 2.94 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। माइक्रोसॉफ्ट का वैल्यूएशन करीब 2.93 ट्रिलियन डॉलर था। कंपनी ने एमेजॉन को भी पीछे छोड़ दिया, जिसकी बाजार हैसियत लगभग 2.66 ट्रिलियन डॉलर है।

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