सरकार ने स्टॉक और कमोडिटी मार्केट के ब्रोकर्स के लिए नियमों में बदलाव किया है। इसका मकसद उनके लिए कंप्लायंस को आसान बनाना है। इसके लिए फाइनेंस मिनिस्ट्री के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (डीईए) ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) रूल्स, 1957 में बदलाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी ब्रोकर की तरफ से किया गया किसी निवेश को बिजनेस एक्टिविटी नहीं माना जाएगा, जब तक कि इस निवेश में क्लाइंट्स का फंड्स या सिक्योरिटीज शामिल नहीं हो या यह ब्रोकर के लिए फाइनेंशियल लायबिलिटी नहीं हो।
