Stock Idea: म्यूचुअल फंड्स की जगह इस शेयर में किया निवेश, तो हो सकता है तगड़ा फायदा!

CAMS Shares: यह कंपनी म्यूचुअल फंड कंपनियों को रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (RTA) की सर्विस देती है। यह देश की सबसे बड़ी RTA है, जिसके पास करीब 68.7 फीसदी मार्केट शेयर है। ऐसे में इसका शेयर म्यूचुअल फंड के बढ़ते क्रेज को भुनाने का मौका देता है। इसके पीछे कई वजहें हैं, जिसे आप इस आर्टिकल में पढ़ सकते हैं-

अपडेटेड Sep 15, 2023 पर 10:53 PM
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CAMS, गैर-म्यूचुअल फंड बिजनेस में भी विस्तार कर रही है

- नेहा दवे

म्यूचुअल फंड की जगह निवेश के लिए CAMS यानी Computer Age Management Services लिमिटेड का शेयर कहीं अधिक बेहतर साबित हो सकता है। मनीकंट्रोल प्रो ने हाल ही में इस शेयर को लेकर एक स्टोरी की है। इसमें एक नहीं बल्कि पूरे 6 कारण बताए गए हैं कि आखिर क्यों यह शेयर म्यूचुअल फंड की जगह कहीं अधिक बेहतर दांव हो सकता हैं। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में इस समय बहुत तेज ग्रोथ देखी जा रही है। खासतौर से SIP के जरिए निवेश का चलन हाल के सालों में काफी बढ़ा है। इसके चलते पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 46 लाख करोड़ रुपये के पार कर गया है। यानी सभी म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास अभी इतना पैसा है, जिसे वे मैनेज कर रही हैं।

CAMS इन्हीं म्यूचुअल फंड कंपनियों को रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट की सर्विस देती है। ऐसे में इसका शेयर म्यूचुअल फंड के बढ़ते क्रेज को भुनाने का मौका देता है। लेकिन यहां पर आपने मन में एक सवाल आ सकता है शेयर बाजार में पहले से कई म्यूचुअल फंड कंपनिया लिस्टेड हैं। जैसे HDFC AMC, निप्पॉन इंडिया, यूटीआई AMC और आदित्य बिड़ला AMC। ऐसे में इन कंपनियों को छोड़कर किसी प्रॉक्सी कंपनी के शेयर में पैसा लगाने का क्या फायदा हो सकता है। खैर इसके पीछे 1 नहीं बल्कि पूरे 6 कारण हैं, आइए इसे एक-एक करके जानते हैं-


1. म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए बेहतर वैल्यू

CAMS का शेयर आपको म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए बेहतर वैल्यू देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश में कुल 44 म्यूचुअल फंड कंपनियां है, जिसमें से सिर्फ 4 ही शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इसमें भी जो सबसे बड़ी कंपनी है, HDFC AMC, उसके पास सिर्फ 11 पर्सेंट मार्केट शेयर है। वहीं CAMS के पास अपने सेगमेंट में एक तरह से मोनोपॉली है। जून के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल AUM में CAMS का मार्केट शेयर 68.7 प्रतिशत था। इसके अलावा CAMS को लेकर कारोबारी जोखिम भी कम है। किसी कंपनी का शेयर खरीदने पर हो सकता है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ग्रोथ कर रही है, लेकिन उस खास कंपनी का AUM घट रहा है। लेकिन CAMS के कारोबारी मॉडल में ऐसे जोखिम कम हैं।

2. कम रेगुलेटरी जोखिम

म्यूचुअल फंड कंपनियों को कई तरह के रेगुलेशन से जुड़े जोखिम झेलने पड़ते है। जैसे अभी सेबी (SEBI) ने हाल ही में इन कंपनियों के टोटल एक्सपेंश रेशियो (TER) में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर यह लागू हुआ तो म्यूचुअल फंड कंपनियों की न सिर्फ कमाई घट जाएगी, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन भी कम हो जाएगा। CAMS के साथ ऐसे रेगुलेटरी जोखिम कम है।

3. कम मार्जिन और हाई-वॉल्यूम बिजनेस

CAMS का सबसे मजबूत पहलू है कि यह कम मार्जिन और हाई-वॉल्यूम वाला बिजनेस है। जैसे iPhone या Windows आज किसी भी यूजर के जीवन का अहम हिस्सा है। वैसे ही म्यूचुअल फंड के कारोबार के लिए CAMS का प्लेटफॉर्म एक अहम हिस्सा है। टोटल एक्सपेंश रेशियो में बदलाव से अगर CAMS पर कोई असर आएगा, तो वह अपने वॉल्यूम के स्तर पर इस कमजोरी को दूर कर सकती है।

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4. कंपनी का मजबूत फाइनेंशियल

कंपनी को कॉम्पिटीशन के स्तर पर कोई खतरा नहीं है। इसका बैलेंस-शीट काफी मजूबत है और उसमें काफी कैश है। पिछले 5 सालों में इसका इक्विटी पर औसत रिटर्न 30 प्रतिशत है, जो अपने आप में काफी शानदार है।

5. गैर-म्यूचुअल फंड बिजनेस में विस्तार

कंपनी गैर-म्यूचुअल फंड बिजनेस में भी विस्तार कर रही है। इसमें अकाउंट एग्रीगेटर, पेमेंट एग्रीगेटर, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज को सेवाएं देना, म्यूचुअल फंड के बदले लोन देना सहित कई बिजनेस शामिल हैं। कंपनी नेशनल पेंशन स्कीम के लिए सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी की सेवाएं भी दे रही है। खास बात यह है अभी ये सभी बिजनेस शुरुआती स्टेज में है और आगे इसमें ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। जून तिमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में गैर-म्यूचुअल फंड बिजनेस का हिस्सा 13 प्रतिशत था, जो आगे बढ़ सकता है।

6. वैल्यूएशन ऊंचा होने के बावजूद वाजिब दिख रहा

CAMS का शेयर अभी वित्त वर्ष 2025 की अनुमानित अर्निंग के 34 गुना पर कारोबार कर रहा है। यह लिस्टेड म्यूचुअल फंड्स कंपनियों के मुकाबले अधिक है। लेकिन अगर आपके इसके RoE को देखें तो यह ठीक लगता है। जून तिमाही में CAMS का रिटर्न ऑन इक्विटी 39 फीसदी रहा। पिछले 5 सालों में इसका रिटर्न ऑन इक्विटी बेहतर हुआ है, लेकिन इसके मुकाबले HDFC AMC का रिटर्न ऑन इक्विटी घटा है। इसके अलावा अभी CAMS के नए बिजनेसों के असर को इसके वैल्यूएशन में पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। इन सब वजहों को देखते हुए CAMS के शेयर को लॉन्ग टर्म के लिहाज से एक बेहतर दांव माना जा सकता है।

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