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Stock in Focus: इस कंपनी की दवा को अमेरिका की FDA ने दी खास मंजूरी, रखा Orphan Drug की कैटेगरी में

Stock in Focus: फार्मा सेक्टर की इस दिग्गज कंपनी की एक सब्सिडरी को अमेरिकी दवा नियामक से रेयर ब्लड कैंसर से जुड़ी एक दवा को खास मंजूरी मिली तो इसके शेयर फटाक से 6% से अधिक उछल गए। अमेरिकी दवा नियामक FDA ने इसे ऑर्फन ड्रग (Orphan Drug) की कैटेगरी में रखा है। जानिए यह कौन सी कंपनी है, एफडीए ने किस दवा को मंजूरी दी है और ऑर्फन ड्रग का मतलब क्या है?

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Jan 28, 2026 पर 5:10 PM
Stock in Focus: इस कंपनी की दवा को अमेरिका की FDA ने दी खास मंजूरी, रखा Orphan Drug की कैटेगरी में
Shilpa Medicare की सब्सिडरी शिल्पा बॉयोलॉजिकल्स और मैबट्री बॉयोलॉजिक्स मिलकर रेयर ब्लड कैंसर के इलाज को लेकर जिस फ्लैगशिप बॉयोलॉजिक दवा पर काम कर रहे हैं, उसे एफडीए ने ऑर्फन ड्रग (Orphan Drug) डेजिनेशन दी है।

Shilpa Medicare Shares: शिल्पा मेडिकेयर की मैटेरियल सब्सिडरी शिल्पा बॉयोलॉजिकल्स और इसकी सहयोगी मैबट्री बॉयोलादिक्स (mAbTree Biologics) को अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से एक दवा के लिए खास मंजूरी मिली तो इसके शेयर रॉकेट बन गए। जैसे ही कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में इस मंजूरी का खुलासा किया, एकाएक इसके शेयर रॉकेट बन गए और यह 6% से अधिक उछल पड़ा। इस तेजी का कई निवेशकों ने फायदा उठाया जिससे इसके भाव नरम पड़े और इसकी अधिकतर तेजी गायब हो गई लेकिन अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। आज बीएसई पर यह 1.67% की बढ़त के साथ ₹273.25 के भाव पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में यह 6.40% उछलकर ₹285.95 तक चढ़ गया था।

कैसी मंजूरी मिली है Shilpa Medicare को और क्या खास है इसमें?

शिल्पा बॉयोलॉजिकल्स और मैबट्री बॉयोलॉजिक्स मिलकर रेयर ब्लड कैंसर के इलाज को लेकर जिस फ्लैगशिप बॉयोलॉजिक दवा पर काम कर रहे हैं, उसे एफडीए ने ऑर्फन ड्रग (Orphan Drug) डेजिनेशन दी है। एक्सचेंज फाइलिंग में शिल्पा मेडीकेयर ने खुलासा किया कि यह मंजूरी एसेंशियल थ्रोम्बोसाइथीमिया और पॉलीसाइथीमिया वेरा के इलाज के लिए विकसित की जा रही एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को दी गई है। ऑर्फन ड्रग का दर्जा मिलने से कंपनी को नियामकीय और कारोबारी प्रोत्साहन मिलते हैं, जिनमें डेवलपमेंट सपोर्ट, टैक्स क्रेडिट्स और पोटेंशियल मार्केट एक्स्क्लूसिविटी शामिल हैं।

शिल्पा मेडीकेयर ग्रुप की शिल्पा बॉयोलॉजिकल्स का कहना है कि यह बॉयोलॉजिक एक फर्स्ट-इन-क्लास, इम्यूनोलॉजी आधारित थेरेपी है जिसे बीमारी के लक्षणों को सिर्फ नियंत्रित करने की बजाय रोग की प्रकृति में बदलाव के लिए डिजाइन किया गया है। एफडीए से मंजूरी मिलने के बाद अब दोनों कंपनियों की योजना इंड-एनेबलिंग स्टडीज के जरिए बॉयोलॉजिक को आगे बढ़ाने की है ताकि एसेंशियल थ्रोम्बोसाइथीमिया (Essential Thrombocythemia) और पॉलीसाइथीमिया वेरा (Polycythemia Vera) से पीड़ित मरीजों में पहली बार मानव पर क्लिनिकल परीक्षण शुरू किए जा सकें।

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