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Stock in News: लिस्टिंग के बाद पहली बार आया रिजल्ट, जोश में 6% चढ़े शेयर

Stock in News: पिछले महीने लिस्ट हुई कंपनी ने शेयर मार्केट में लिस्टिंग के बाद पहली बार कारोबारी नतीजे पेश किए और उसका असर शेयरों पर काफी पॉजिटिव दिखा। कमजोर मार्केट में भी इसके शेयर रॉकेट बन गए। जानिए कंपनी के कारोबारी नतीजे की खास बातें क्या रही, जिससे शेयर जोश में आए और अब तक इसकी चाल कैसी रही

Edited By: Jeevan Deep Vishawakarmaअपडेटेड Sep 08, 2026 पर 3:59 PM
Stock in News: लिस्टिंग के बाद पहली बार आया रिजल्ट, जोश में 6% चढ़े शेयर
Shiprocket के लिए चालू वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का घाटा कम हुआ तो रेवेन्यू में बढ़ोतरी आई। इससे कंपनी के शेयरों में जोश आ गया।

Stock in News: पिछले महीने लिस्ट हुई ई-कॉमर्स एनेबलमेंट कंपनी शिपरॉकेट के शेयर आज कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में भी मजबूत हुए लेकिन फिर मुनाफावसूली में यह लाल हो गया। जून 2026 तिमाही के धमाकेदार कारोबारी नतीजे से इसे सपोर्ट मिला और शेयर रॉकेट बन गए। इसके शेयरों में यह तेजी ऐसे समय में आई, जब शुरुआती कारोबार में ही घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) आधे-आधे फीसदी से अधिक फिसल गए। वहीं दूसरी तरफ शिपरॉकेट के शेयर 6% से अधिक उछल पड़े।

इस तेजी का निवेशकों ने फायदा उठाया तो इसकी पूरी तेजी गायब हो गई। टूटकर यह ₹132.80 तक आ गया। दिन के आखिरी तक यह हल्का रिकवर होकर 0.52% की गिरावट के साथ ₹135.10 (Shiprocket Sare Price) पर बंद हुआ। इंट्रा-डे में यह 6.33% उछलकर ₹144.40 तक पहुंच गया था।

Shiprocket के लिए कैसी रही जून तिमाही?

शिपरॉकेट के लिए चालू वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का घाटा कम हुआ तो रेवेन्यू में बढ़ोतरी आई। कंसालिडेटेड लेवल पर जून तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी का नेट लॉस ₹18.03 करोड़ से घटकर ₹13.71 करोड़ पर आ गया तो इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू 33.81% चढ़कर ₹592.09 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर बात करें तो कंपनी का ईबीआईटीडीए लॉस इस दौरान ₹26 करोड़ से ₹21 करोड़ पर आ गया तो एडजस्टेड बेसिस पर यह ₹1 करोड़ से बढ़कर ₹8.9 करोड़ के पॉजिटिव लेवल पर रहा। कंपनी का कहना है कि पूरी तिमाही में इसका एडजस्टेड ईबीआईटीडीए पॉजिटिव बना रहा। कंपनी की एडजस्टेड प्रॉफिटेबिलिटी में यह सुधार ऐसे समय में हुआ, जब कंपनी अपने तेजी से आगे बढ़ रहे नए बिजनेस में लगातार निवेश कर रही थी।

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