दिग्गज इनवेस्टर वॉरेन बफे की बातें इनवेस्टर्स बड़े गौर से सुनते हैं। उन्होंने निवेश के बारे में 1986 में एक बड़ी बात कही थी। उन्होंने कहा था-जब दूसरे लालच कर रहे हों तो आपको डरना चाहिए और जब दूसरे डर रहे हों तो आपको लालची बनना चाहिए। बफे की यह सलाह आज के बाजार पर सटीक बैठ रही है। मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई। पूरे मार्च भारतीय शेयर बाजारों पर दबाव बना रहा। अप्रैल में रिकवरी दिखी है।
बाजार में बड़ी गिरावट से निवेशकों में डर
अप्रैल में रिकवरी तो आई है, लेकिन मार्च में आई गिरावट की वजह से निवेशकों में अभी डर बना हुआ है। कई इनवेस्टर्स बाजार से दूरी बना रहे हैं। कुछ इनवेस्टर्स को तो इक्विटी फंडों में निवेश करने में भी डर लग रहा है। इसकी वजह यह है कि बीते डेढ़ साल में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। सितंबर 2024 के आखिर में सेंसेक्स ने ऑल टाइम हाई बनाया था। उसके बाद बाजार में बड़ी गिरावट आई। बीते दिसंबर और जनवरी के दौरान प्रमुख सूचकांकों ने ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बनाए। लेकिन, तेजी टिक नहीं पाई।
सस्ते भाव पर निवेश करने से होती है मोटी कमाई
एक्सपर्ट्स का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजारों की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव हो गई है। इनवेस्टर्स को बफे की 1986 की सलाह पर गौर करने की जरूरत है। आज जब बाजार में डर का माहौल है तब उन्हें निवेश करना चाहिए। कई दिग्गज कंपनियों के शेयर अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे हैं। ऐसे मौके बहुत कम आते हैं। मुश्किल समय खत्म होते ही इन शेयरों में तेजी दिखेगी। तब उन निवेशकों को ज्यादा रिटर्न मिलेगा, जिन्होंने कम भाव पर निवेश किया होगा।
ये शेयर 52 हफ्ते के अपने लो के करीब
कनटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का शेयर अपने 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर के करीब है। हालांकि, बीते एक महीने में यह 22 फीसदी चढ़ा है। बीएसई में इसका 52 हफ्ते का लो 460 रुपये है। अभी यह 517 रुपये पर चल रहा है। लेकिन, ध्यान रखने वाली बात है कि 14 जून, 2024 को इस शेयर का प्राइस 911 रुपये था। विप्रो के शेयर का 52 हफ्ते का लो 194 रुपये है। अभी यह 204 रुपये है। यह शेयर 31 दिसंबर, 2021 को 357 रुपये पर था। अंबुजा सीमेंट्स का शेयर अभी 52 हफ्ते के लो पर है। अभी इसकी कीमत 460 रुपये है।
लंबी अवधि के निवेश पर फोकस करने की सलाह
बाजार के जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार में शॉर्ट टर्म के उतार-चढ़ाव पर ध्यान देने की जगह उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहिए, जिनकी वित्तीय सेहत अच्छी है, कॉर्पोरेट गवर्नेस बेहतर है और मुनाफा कमाने का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड है। बाजार में रिकवरी आने या सेक्टर से जुड़े चैलेंजेज दूर होने पर इन शेयरों में रिकवरी आती है। इसलिए एक्सपर्ट्स इन शेयरों में सिर्फ लंबी अवधि के लिए निवेश करने की सलाह देते हैं।